बोकारो30जून2026/ कार्यालय से चायपत्ती और बिस्कुट घर ले जाने के आरोप में नौकरी से निकाले गए संविदा चपरासी को झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। अदालत ने बर्खास्तगी के आदेश को रद्द करते हुए कर्मचारी को तत्काल सेवा में बहाल करने और 50 प्रतिशत बकाया वेतन देने का निर्देश दिया है। साथ ही बोकारो प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए इस कार्रवाई को “असंवेदनशील और अमानवीय” बताया।
मामला जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए), बोकारो में कार्यरत संविदा चपरासी रंजीत कुमार हिमांशु से जुड़ा है। वर्ष 2005 में नियुक्त रंजीत ने 17 वर्षों तक सेवा दी। वर्ष 2022 में उन पर कार्यालय से चायपत्ती और बिस्कुट घर ले जाने का आरोप लगा, जिसके बाद उन्हें बिना स्पष्ट कारण बताए सेवा से हटा दिया गया।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि यदि कर्मचारी से गलती हुई भी थी, तब भी 17 वर्ष की बेदाग सेवा के बाद सीधे नौकरी से निकाल देना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। अदालत ने टिप्पणी की कि यह फैसला “आत्मा को झकझोर देने वाला” है और प्रशासन ने कर्मचारी की पारिवारिक परिस्थितियों तथा लंबे सेवा रिकॉर्ड की पूरी तरह अनदेखी की।
कोर्ट ने यह भी कहा कि कारण बताओ नोटिस इतना अस्पष्ट था कि उसे नोटिस कहना भी उचित नहीं होगा। अदालत ने माना कि रंजीत की पत्नी, तीन बेटियों और छोटी बहन का भरण-पोषण इसी नौकरी से होता था, लेकिन प्रशासन ने इस मानवीय पहलू पर कोई विचार नहीं किया।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि रंजीत कुमार हिमांशु को 1 जुलाई तक सेवा में बहाल किया जाए तथा 31 जुलाई 2026 तक 50 प्रतिशत बकाया वेतन का भुगतान किया जाए। शेष 50 प्रतिशत वेतन की कटौती को ही उनकी कथित गलती की पर्याप्त सजा माना जाए।
इसके साथ ही अदालत ने उपायुक्त और उप विकास आयुक्त, बोकारो को व्यक्तिगत रूप से आदेश का पालन सुनिश्चित करने और निर्धारित समय सीमा के भीतर अनुपालन रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।