जगदलपुर, 25 जून 2026।
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और किसानों के लिए आसान बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। कलेक्टर आकाश छिकारा के निर्देश पर इस वर्ष धान खरीदी के लिए एग्रीस्टेक आईडी (फार्मर आईडी) को अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही किसान पंजीयन और आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया 1 जुलाई से 31 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन संचालित की जाएगी।
जिला प्रशासन के अनुसार, अब किसानों को अलग-अलग पोर्टलों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पंजीयन और संशोधन का पूरा कार्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की वेबसाइट fcs.cg.gov.in के ऑनलाइन सोसायटी मॉड्यूल के माध्यम से किया जाएगा। वहीं, इस वर्ष धान खरीदी के लिए केवल वही रकबा मान्य होगा, जिसकी प्रविष्टि एग्रीस्टेक पोर्टल पर डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज होगी। यह सर्वे 15 अगस्त से 31 अक्टूबर 2026 तक किया जाएगा।
प्रशासन ने पहले से पंजीकृत किसानों को भी बड़ी राहत दी है। जिन किसानों ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में पंजीयन कराया था और जिनके पास किसान कोड उपलब्ध है, उन्हें दोबारा पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी। उनकी भूमि और रकबे का विवरण राजस्व विभाग के माध्यम से स्वतः अपडेट कर दिया जाएगा। हालांकि, जिन किसानों की जमीन में नामांतरण, बंटवारा या फौती के कारण बदलाव हुआ है, उन्हें संबंधित समिति में जाकर संशोधन कराना होगा।
वहीं, नए किसानों को पहले एग्रीस्टेक पोर्टल पर अपना पंजीयन कराना होगा। इसके बाद वे समिति में जाकर अपनी भूमि, बैंक खाते और नॉमिनी से जुड़ी जानकारी दर्ज करा सकेंगे। यह व्यवस्था वनाधिकार पट्टाधारियों, डूबान क्षेत्र के किसानों, शासकीय पट्टेदारों, कोटवारों तथा संस्थागत किसानों पर भी समान रूप से लागू होगी। अधिया, रेगहा और लीज पर खेती करने वाले किसानों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं, ताकि वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत धान बेच सकें।
इस वर्ष भी धान खरीदी पूरी तरह बायोमेट्रिक सत्यापन के आधार पर होगी। किसान स्वयं या अपने द्वारा नामित परिवार के सदस्य—जैसे माता-पिता, पति-पत्नी, पुत्र-पुत्री, दामाद, पुत्रवधू या सगे भाई-बहन—के माध्यम से भी धान का विक्रय कर सकेंगे। धान खरीदी की अंतिम तिथि तक नॉमिनी बदलने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।
कलेक्टर आकाश छिकारा ने सभी समिति प्रबंधकों, संबंधित अधिकारियों और डेटा एंट्री ऑपरेटरों को निर्देश दिए हैं कि नई व्यवस्था का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही किसानों को समय रहते प्रशिक्षण और आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि पंजीयन से लेकर धान विक्रय तक किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।