3जून2026
जगदलपुर। बस्तर जिले के जगदलपुर स्थित केंद्रीय जेल में एक महिला बंदी की मौत का मामला सामने आने के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रविवार तड़के महिला बंदी जयमती बघेल का शव जेल परिसर के भीतर फांसी के फंदे पर लटका मिला। घटना के बाद जेल प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
मिली जानकारी के अनुसार, दरभा क्षेत्र के चितापुर गांव की निवासी जयमती बघेल करीब दो महीने से केंद्रीय जेल में न्यायिक हिरासत के तहत बंद थी। उस पर अपने चाचा की हत्या का आरोप था। बताया जाता है कि पारिवारिक विवाद और लंबे समय से चल रही प्रताड़ना के चलते उसने यह कदम उठाया था, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
अब जेल के भीतर हुई उसकी मौत कई सवालों को जन्म दे रही है। आमतौर पर केंद्रीय जेलों में बंदियों की सुरक्षा, नियमित निगरानी और समय-समय पर जांच की व्यवस्था रहती है। इसके बावजूद एक महिला बंदी का कथित रूप से फांसी लगाना सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक की ओर इशारा कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जेल के भीतर उसे ऐसा कदम उठाने का मौका कैसे मिला और उस दौरान निगरानी व्यवस्था कहां थी।
सूत्रों के अनुसार, जयमती पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव में थी। उसके तीन छोटे बच्चे हैं और बताया जा रहा है कि जेल में रहने के दौरान परिवार के सदस्यों का उससे संपर्क बेहद कम था। पति और अन्य परिजनों के मुलाकात के लिए नहीं आने से वह काफी परेशान रहती थी। ऐसे में अकेलापन और मानसिक दबाव उसके लिए बड़ी चुनौती बन गया था। हालांकि इन कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और मर्ग कायम कर मामले की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मौत आत्महत्या है या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी हो सकता है।
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू जेल प्रशासन की भूमिका भी है। अधिकारियों को यह स्पष्ट करना होगा कि बंदी की मानसिक स्थिति को लेकर क्या कोई विशेष निगरानी रखी जा रही थी, सुरक्षा मानकों का पालन किस स्तर तक हो रहा था और घटना के समय ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका क्या रही।
फिलहाल इस घटना ने न केवल एक परिवार को गहरे दुख में डाल दिया है, बल्कि केंद्रीय जेल की सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य और निगरानी तंत्र को लेकर भी गंभीर बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिनसे इस मौत की वास्तविक परिस्थितियों का खुलासा हो सकेगा।