“CSPDCL दफ्तर में रिश्वत का खेल!” इंजीनियर का VIDEO वायरल, ठेकेदार से कैश लेते दिखा अधिकारी, विभाग में मचा हड़कंप

27मई 2026

रायपुर। राजधानी रायपुर के गुढ़ियारी स्थित CSPDCL प्रोजेक्ट ऑफिस से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में विभाग के एक कार्यपालन इंजीनियर कथित तौर पर ठेकेदार से रुपए लेते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद बिजली विभाग की कार्यप्रणाली, टेंडर सिस्टम और सप्लाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।

जानकारी के मुताबिक वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे अधिकारी का नाम मुरली मौर्य बताया जा रहा है, जो CSPDCL के मुख्य अभियंता प्रोजेक्ट कार्यालय में पदस्थ हैं। दावा किया जा रहा है कि एक ठेकेदार द्वारा काम और बिल पास कराने के बदले रकम दी जा रही थी। सबसे बड़ी बात यह बताई जा रही है कि कथित लेन-देन किसी बाहरी जगह नहीं बल्कि ऑफिस के भीतर ही हुआ।

वीडियो को लेकर यह भी चर्चा है कि रकम केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं थी, बल्कि कथित तौर पर ऑफिस में मौजूद अन्य कर्मचारियों तक भी पहुंचाई गई। इस पूरे घटनाक्रम ने विभाग के अंदर चल रहे कथित कमीशनखोरी नेटवर्क की चर्चाओं को और हवा दे दी है।

सोशल मीडिया में वायरल हो रहे वीडियो के बाद राजनीतिक फंडिंग और चुनावी तैयारियों को लेकर भी तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं। दावा किया जा रहा है कि कुछ ठेकेदारों और सप्लायरों से चुनाव के नाम पर फंड जुटाने की चर्चा भी वीडियो में सुनाई दे रही है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार संबंधित इंजीनियर लंबे समय से महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट और खरीदी प्रक्रिया से जुड़े रहे हैं। उन पर बिजली सामग्री जैसे तार, खंभे और अन्य उपकरणों की सप्लाई में कथित तौर पर प्रभाव रखने के आरोप भी लगते रहे हैं। साथ ही कमीशन लेकर घटिया सामग्री खरीदे जाने जैसी चर्चाएं भी सामने आती रही हैं।

बताया जा रहा है कि इससे पहले भी टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर उनका नाम विवादों में आ चुका है। पुराने मामलों में ट्रांसफर की कार्रवाई होने की चर्चा भी रही, लेकिन इसके बावजूद उनकी पदस्थापना रायपुर में बनी रही।

सबसे हैरानी की बात यह है कि वीडियो वायरल होने के बाद भी अब तक विभाग की ओर से किसी प्रकार की आधिकारिक कार्रवाई सामने नहीं आई है। मामले को लेकर मीडिया द्वारा संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन संबंधित अधिकारी का मोबाइल बंद बताया जा रहा है।

अब यह मामला सोशल मीडिया से निकलकर विभागीय गलियारों और राजनीतिक चर्चाओं तक पहुंच गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि सरकारी दफ्तरों में खुलेआम इस तरह लेन-देन हो रहा है, तो भ्रष्टाचार पर कार्रवाई आखिर कब होगी।

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