खेल-खेल में नन्हों ने सीखा विज्ञान और कला का जादू

बस्तर के आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों ने मिट्टी से बनाए दीये, पेपर कप फोन से समझीं आवाज़ की तरंगें

जगदलपुर, 25 मई 2026।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बस्तर जिले के आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए इन दिनों रचनात्मक और नवाचार आधारित गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में स्वयंसेवी संस्था ‘तितली’ के सहयोग से आयोजित विशेष गतिविधि में बच्चों ने खेल-खेल में विज्ञान और कला की बारीकियों को बेहद रोचक तरीके से सीखा।

कार्यक्रम के दौरान नन्हे बच्चों ने गीली मिट्टी से सुंदर और आकर्षक दीये तैयार किए। मिट्टी से जुड़ी इस गतिविधि ने बच्चों को पारंपरिक कला से जोड़ने के साथ-साथ उनके हाथों की पकड़, स्पर्श की समझ और रचनात्मक क्षमता को भी विकसित किया। माटी की खुशबू और बच्चों की मुस्कान ने पूरे आंगनबाड़ी परिसर को जीवंत बना दिया।

वहीं बच्चों के लिए सबसे खास आकर्षण ‘पेपर कप फोन’ रहा। डिस्पोजल पेपर कप और धागे की मदद से बनाए गए इस अनोखे खिलौने के जरिए बच्चों ने आवाज़ के एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने की प्रक्रिया को बेहद सरल और मनोरंजक ढंग से समझा। एक बच्चे द्वारा बोले गए शब्द जब दूसरे बच्चे तक साफ सुनाई दिए, तो उनकी खुशी देखते ही बन रही थी। इस प्रयोग ने बच्चों के भीतर विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और संवाद की समझ को बढ़ावा दिया।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और ‘तितली’ संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि ऐसी गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों में रटने की आदत के बजाय सीखने की उत्सुकता विकसित करना है। खेल आधारित इन प्रयोगों से बच्चों की कल्पनाशीलता, आत्मविश्वास और वैज्ञानिक सोच को नई दिशा मिल रही है।

बस्तर के आंगनबाड़ी केन्द्रों में हो रहे ये प्रयास इस बात का प्रमाण हैं कि सही मार्गदर्शन और रचनात्मक माहौल मिलने पर नौनिहालों का भविष्य उज्ज्वल, जागरूक और नवाचार से भरपूर बन सकता है।

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