25मई 2026
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले की बेटी अमिता श्रीवास ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर इतिहास रच दिया है। 22 मई 2026 को उन्होंने 8848.86 मीटर ऊंचे एवरेस्ट शिखर पर पहुंचकर न केवल अपना सपना पूरा किया, बल्कि पूरे प्रदेश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।
अमिता की इस उपलब्धि के पीछे महीनों की कठिन मेहनत, कड़ी ट्रेनिंग और जान जोखिम में डालने वाला संघर्ष शामिल रहा। एवरेस्ट अभियान के दौरान उन्होंने बेस कैंप में रहकर लगातार अभ्यास किया और कई बार कैंप-1, कैंप-2 और कैंप-3 तक चढ़ाई कर खुद को बेहद कम ऑक्सीजन वाले माहौल के लिए तैयार किया।
एवरेस्ट का सबसे खतरनाक हिस्सा माने जाने वाले खुंबू आइसफॉल को पार करना भी किसी चुनौती से कम नहीं था। बर्फ की विशाल दरारों और मौत जैसे हालात के बीच अमिता ने हिम्मत नहीं हारी। मई के तीसरे सप्ताह में मौसम अनुकूल होते ही उन्होंने अंतिम अभियान शुरू किया।
20 मई को अमिता साउथ कोल यानी कैंप-4 पहुंचीं, जिसे पर्वतारोहण की भाषा में “डेथ जोन” कहा जाता है। यहां ऑक्सीजन बेहद कम होती है और तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है। कड़ाके की ठंड और तेज बर्फीली हवाओं के बीच उन्होंने 21 मई की रात अंतिम चढ़ाई शुरू की और 22 मई की सुबह एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा लहराने में सफलता हासिल की।
हालांकि यह ऐतिहासिक जीत उनके लिए भारी भी पड़ गई। वापसी के दौरान अत्यधिक ठंड, थकावट और ऑक्सीजन की कमी के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई। गंभीर हालत में उन्हें हेलिकॉप्टर से नेपाल की राजधानी काठमांडू लाया गया, जहां एक अस्पताल में उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के मुताबिक वे फ्रॉस्टबाइट और हाई एल्टीट्यूड से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं।
अमिता की स्थिति को लेकर छत्तीसगढ़ में चिंता का माहौल है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई है और अधिकारियों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
एक ओर जहां अमिता ने एवरेस्ट फतह कर छत्तीसगढ़ का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया, वहीं अब पूरा प्रदेश उनकी जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहा है।