14मई2026
तेलंगाना के जगतियाल जिले में एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया। कभी माओवादी संगठन में बड़े पद पर रह चुके थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ने 40 साल बाद फिर से परीक्षा हॉल में बैठकर इंटरमीडिएट की परीक्षा दी। उम्र के इस पड़ाव में किताब और कॉपी लेकर परीक्षा केंद्र पहुंचा देवजी अब अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी कर नई जिंदगी शुरू करना चाहता है।
कोरुतला कस्बे के रहने वाले देवजी ने 1980 के दशक में कॉलेज की पढ़ाई के दौरान कट्टरपंथी विचारधारा का रास्ता चुन लिया था। उस समय वे छात्र संगठन से जुड़े और धीरे-धीरे माओवादी गतिविधियों में सक्रिय होते चले गए। पढ़ाई बीच में छूट गई और इंटरमीडिएट का तेलुगु विषय अधूरा रह गया। हालांकि बाकी सभी विषयों में वे पास हो चुके थे, लेकिन एक पेपर बाकी होने के कारण उनकी पढ़ाई पूरी नहीं मानी गई।
हाल ही में आत्मसमर्पण करने के बाद देवजी ने तय किया कि अब वे बंदूक नहीं, बल्कि शिक्षा और कानून के जरिए समाज की सेवा करेंगे। इसी सोच के साथ उन्होंने इंटरमीडिएट बोर्ड से विशेष अनुमति लेकर सप्लीमेंट्री परीक्षा दी। परीक्षा केंद्र में पहुंचने के बाद उन्होंने कहा कि इतने सालों बाद परीक्षा देना उनके लिए बिल्कुल नया अनुभव था, क्योंकि अब परीक्षा का तरीका और माहौल दोनों बदल चुके हैं।
देवजी ने बताया कि इंटरमीडिएट पास करने के बाद वे एलएलबी की पढ़ाई करना चाहते हैं, ताकि गरीब और जरूरतमंद लोगों को कानूनी सहायता दे सकें। कभी जंगलों में संगठन चलाने वाला यह शख्स अब अदालत में लोगों की मदद करने का सपना देख रहा है।
यह कहानी सिर्फ एक परीक्षा की नहीं, बल्कि जिंदगी में बदलाव और दूसरी शुरुआत की मिसाल बन गई है।