14मई 2026
बंगाल -माधई पात्रा ने आखिरकार बंदूक का रास्ता छोड़ समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला कर लिया। लंबे समय तक बिहार, ओडिशा, झारखंड और बंगाल में माओवादी गतिविधियों से जुड़े रहे माधई ने कोलकाता पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। उनके इस कदम को सुरक्षा एजेंसियां माओवादी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका मान रही हैं।
हुगली जिले के जांगीपाड़ा निवासी माधई पात्रा ने आत्मसमर्पण के बाद कहा कि लगातार बिगड़ती सेहत और जंगलों में कठिन जीवन के कारण उन्होंने यह फैसला लिया। उन्होंने बताया कि संगठन के इनचार्ज मिहिर बेसरा से चर्चा और अनुमति मिलने के बाद ही उन्होंने पुलिस प्रशासन से संपर्क किया।
माधई ने अपने पुराने साथियों से भी भावुक अपील करते हुए कहा कि हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जिंदगी अपनाना ही बेहतर विकल्प है। उन्होंने कहा कि सरकार की पुनर्वास योजनाओं का लाभ उठाकर लोग सम्मानजनक जीवन जी सकते हैं। अब वे आम नागरिक की तरह काम करके शांतिपूर्ण जीवन बिताना चाहते हैं।
इस घटनाक्रम को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उस रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें देश से माओवाद खत्म करने की बात कही गई थी। हालांकि निर्धारित समय सीमा गुजर चुकी है, लेकिन लगातार हो रहे सरेंडर और गिरफ्तारियां सुरक्षा बलों के अभियान को मजबूती देती नजर आ रही हैं।
इसी बीच कोलकाता पुलिस ने एक अन्य वांछित माओवादी नेता श्रद्धा विश्वास उर्फ बेला को भी गिरफ्तार किया है, जिस पर झारखंड सरकार ने 15 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। एक तरफ गिरफ्तारी और दूसरी तरफ आत्मसमर्पण की इन घटनाओं ने माओवादी संगठनों पर बढ़ते दबाव को साफ कर दिया है।