4मई2026
देशभर में 3 मई को आयोजित NEET UG 2026 परीक्षा इस बार कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच संपन्न हुई, लेकिन इन सख्त जांच प्रक्रियाओं ने कई नए विवाद भी खड़े कर दिए। लगभग 22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी, जिनमें से कई को परीक्षा केंद्रों पर एंटी-चीटिंग जांच के दौरान असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
सूरत से सामने आए एक मामले ने खासा ध्यान खींचा, जहां एक छात्रा से उसकी धार्मिक आस्था से जुड़ी तुलसी माला उतरवाने को कहा गया। इस घटना के बाद अभिभावकों और स्थानीय लोगों में नाराज़गी देखने को मिली। इससे पहले भी सुरक्षा जांच के दौरान छात्रों के हाथों में बंधे धार्मिक धागों को काटे जाने जैसी घटनाएं चर्चा में रह चुकी हैं, जिससे संवेदनशीलता का मुद्दा बार-बार उठता रहा है।
इसी बीच, सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ वीडियो ने जांच प्रक्रिया में असमानता के आरोपों को हवा दी। कुछ केंद्रों पर बुर्का पहनने वाली छात्राओं से केवल पहचान के लिए चेहरा दिखाने को कहा गया और उन्हें बाकी परिधान बनाए रखने की अनुमति दी गई, जबकि अन्य जगहों पर धार्मिक वस्तुओं को हटाने के निर्देश दिए गए। इस अंतर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या नियमों का पालन सभी के लिए एक जैसा हो रहा है या नहीं।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, हिजाब जैसे पारंपरिक परिधानों की अनुमति है, लेकिन इसके लिए उम्मीदवारों को पहले से केंद्र पर पहुंचकर जांच प्रक्रिया पूरी करनी होती है। बावजूद इसके, अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों का कहना है कि नियमों की स्पष्टता और एकरूपता जरूरी है, ताकि परीक्षा की निष्पक्षता के साथ-साथ धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं का भी सम्मान बना रहे।
पिछले वर्षों में पेपर लीक जैसी घटनाओं के चलते सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया गया है, लेकिन अब यह बहस तेज हो गई है कि सख्ती और संवेदनशीलता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि स्पष्ट, पारदर्शी और समान रूप से लागू होने वाले दिशा-निर्देश ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकते हैं।