जगदलपुर, 23 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘ज्ञानभारतम’ पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत बस्तर जिले के दूरस्थ ग्रामीण इलाकों से एक बड़ी ऐतिहासिक खोज सामने आई है। ग्राम पंचायत बेसोली के अंतर्गत बोड़नपाल और कोलचुर गांवों में अत्यंत प्राचीन ताड़पत्र पांडुलिपियां मिली हैं, जो क्षेत्र की सदियों पुरानी बौद्धिक और साहित्यिक परंपरा का जीवंत प्रमाण हैं।
अब तक गुमनामी में छिपी रही ये पांडुलिपियां न केवल छत्तीसगढ़ के प्राचीन चिकित्सा विज्ञान, ज्योतिष और साहित्य की जानकारी समेटे हुए हैं, बल्कि बस्तर की लोक परंपराओं और ज्ञान परंपरा के कई अनछुए पहलुओं को भी उजागर करती हैं। इस महत्वपूर्ण खोज से ‘ज्ञानभारतम’ अभियान को नई गति मिली है और शोधार्थियों के लिए अध्ययन के नए द्वार खुल गए हैं।
शासन की इस पहल का उद्देश्य इन प्राचीन धरोहरों को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक तकनीक के माध्यम से उनका दस्तावेजीकरण और संरक्षण करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी गौरवशाली संस्कृति और पूर्वजों के ज्ञान से सीधे जुड़ सकें। बस्तर के इन गांवों से मिली पांडुलिपियां अब प्रदेश के स्वर्णिम इतिहास को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
बस्तर की मिट्टी से निकला ज्ञान का खजाना: बोड़नपाल-कोलचुर में मिलीं सदियों पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां