रायपुर | रायपुर में महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक माहौल तेज होता नजर आ रहा है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन और विरोध में सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं, जहां मुद्दा अब केवल चर्चा तक सीमित नहीं, बल्कि सड़कों पर भी दिखाई देने लगा है।
भाजपा महिला मोर्चा की ओर से निकाली गई जन आक्रोश पदयात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी देखी गई। रैली के जरिए सरकार समर्थक गुट ने इसे महिलाओं के अधिकार और 33 प्रतिशत आरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। वहीं, विपक्ष ने इस पूरे आयोजन को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन करार देते हुए इसके उद्देश्य पर सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस पर महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों में बाधा डालने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि यह कानून महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है, जिसे विपक्ष राजनीतिक कारणों से कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।
दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने रैली की भीड़ पर सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह असफल बताया। उन्होंने दावा किया कि अपेक्षित संख्या में महिलाएं नहीं पहुंचीं और सरकारी संसाधनों के बावजूद आयोजन प्रभावहीन रहा।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी केंद्र सरकार से सीधा सवाल करते हुए पूछा कि जब महिला आरक्षण कानून पारित हो चुका है, तो इसे लागू करने में देरी क्यों की जा रही है। उन्होंने इसे राजनीतिक लाभ के लिए टालने का आरोप लगाया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा जितना सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण है, उतना ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील भी बन चुका है। सभी दल इसके जरिए अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में हैं।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में महिला आरक्षण का मुद्दा अब सियासी बहस से आगे बढ़कर शक्ति प्रदर्शन और आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन गया है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या यह पहल वास्तव में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम बनेगी, या फिर राजनीति के शोर में असली मुद्दा पीछे छूट जाएगा।
महिला आरक्षण पर पदयात्रा से गरमाई सियासत: सड़क पर शक्ति, बयानबाज़ी तेज