11मार्च2026
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे एक पूर्व नक्सली कमांडर को अब तक पुनर्वास योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पाया है। हालात यह हैं कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनवाने के दौरान वह कर्जदार हो गया है और मदद के लिए दर-दर भटक रहा है।
जानकारी के अनुसार बलरामपुर जिले के बादा ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम गम्हरिया निवासी सीताराम सोनवानी कभी नक्सली संगठन में एरिया कमांडर के पद पर सक्रिय था। उसने वर्ष 2021 में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया था। उस समय उसे रोजगार, जमीन और आवास जैसी सुविधाएं दिलाने का आश्वासन दिया गया था।
सरकारी सर्वे के बाद उसे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर निर्माण की स्वीकृति मिली। मकान बनाने के लिए करीब दो लाख रुपए की मंजूरी दी गई थी, लेकिन अब तक केवल पहली किश्त के रूप में 40 हजार रुपए ही जारी किए गए। बाकी किश्तें न मिलने के कारण उसे अपना घर पूरा करने के लिए स्थानीय व्यापारियों से कर्ज लेना पड़ा।
सीताराम का कहना है कि घर बनकर तैयार हो गया, लेकिन दूसरी और तीसरी किश्त अब तक नहीं मिली। इसके लिए उसने जिला प्रशासन से कई बार गुहार लगाई, फिर भी समस्या का समाधान नहीं हो सका। आर्थिक तंगी का असर उसके परिवार पर भी पड़ रहा है और बच्चों की पढ़ाई तक प्रभावित हो रही है।
पूर्व नक्सली का कहना है कि आत्मसमर्पण के बाद बेहतर जिंदगी की उम्मीद थी, लेकिन योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिलने से वह फिर से परेशानियों में घिर गया है। अब वह प्रशासन से जल्द सहायता मिलने की उम्मीद लगाए बैठा है।