जगदलपुर, 28 फरवरी 2026। बस्तर जिले में दिव्यांग बच्चों की शिक्षा को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत तीन दिवसीय जिला स्तरीय शिक्षक एवं अभिभावक उन्मुखीकरण कार्यक्रम का समापन शुक्रवार को खंड स्रोत समन्वयक कार्यालय, जगदलपुर में हुआ। राज्य परियोजना कार्यालय के निर्देश और कलेक्टर आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम ने समावेशी शिक्षा के लक्ष्य को मजबूती देने का कार्य किया।
कार्यक्रम में जिले के सातों विकासखंडों से 55 प्राथमिक और 55 उच्च प्राथमिक शिक्षक शामिल हुए। इसके साथ 165 दिव्यांग छात्र, उनके अभिभावक, बीआरपी और अटेंडेंट मिलाकर लगभग 180 प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
अधिकार, संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीक पर जोर
प्रशिक्षण सत्रों में मास्टर ट्रेनर्स ने समावेशी शिक्षा की अवधारणा को विस्तार से समझाया। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत चिन्हित 21 प्रकार की दिव्यांगताओं की जानकारी दी गई तथा कक्षा में पाठ्यक्रम अनुकूलन और प्रभावी शिक्षण रणनीतियों पर चर्चा की गई। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के उपयोग के माध्यम से दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के व्यावहारिक उपाय भी बताए गए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों के अनुरूप दिव्यांग विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया।
प्रशासनिक प्रक्रियाओं की भी मिली जानकारी
शिविर में दिव्यांग प्रमाण-पत्र बनवाने की प्रक्रिया और समग्र शिक्षा सहित विभिन्न शासकीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी साझा की गई, जिससे अभिभावकों को आवश्यक लाभ तक पहुंचने में आसानी हो सके। अंतिम सत्र में प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान किया गया, जिससे उनमें नई ऊर्जा और भरोसा दिखाई दिया।
सामूहिक प्रयास से सफल आयोजन
इस आयोजन की सफलता में सीईओ जिला पंचायत प्रतीक जैन, जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल, जिला मिशन समन्वयक अशोक पाण्डे, समावेशी शिक्षा प्रभारी राजेश त्यागी, फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. मतिउर रहमान, बीआरपी सुरेश गुप्ता, चन्द्रशेखर नायडू, तेजमणी दास, अचिंत्य दास, वंदना जैन, रोहित जाधव तथा स्पेशल एजुकेटर सचिन कुर्रे का उल्लेखनीय योगदान रहा।
यह पहल बस्तर में शिक्षा को अधिक समावेशी, संवेदनशील और सशक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।
समावेशी शिक्षा को नई गति: तीन दिवसीय उन्मुखीकरण से शिक्षकों-अभिभावकों को मिला सशक्त मार्गदर्शन