बीजापुर, 7 फरवरी 2026।
महामहिम राष्ट्रपति के बस्तर आगमन के अवसर पर छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन अभियान को एक बड़ी सफलता मिली है। “पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के तहत साउथ सब जोनल ब्यूरो से जुड़े 30 माओवादी कैडरों ने हिंसा और उग्र विचारधारा का परित्याग कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
छत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के अंतर्गत आत्मसमर्पण करने वाले इन 30 माओवादियों पर उनके पद और संगठनात्मक भूमिका के अनुसार कुल ₹85 लाख का इनाम घोषित था। मुख्यधारा में लौटे कैडरों में 20 महिला और 10 पुरुष शामिल हैं, जिन्होंने शांति, संवाद और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास जताया है।
शनिवार को यह आत्मसमर्पण उप पुलिस महानिरीक्षक केरिपु ऑप्स बीजापुर सेक्टर श्री बी.एस. नेगी, पुलिस अधीक्षक बीजापुर डॉ. जितेंद्र कुमार यादव सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष संपन्न हुआ। आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों में कंपनी नंबर 02 एवं 07 के सदस्य, एरिया कमेटी सदस्य, पीपीसीएम, पार्टी सदस्य, डीएकेएमएस और जनताना सरकार के पदाधिकारी शामिल हैं।
नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी उपलब्धि
पुलिस के अनुसार 01 जनवरी 2024 से अब तक जिले में
918 माओवादी कैडर समाज की मुख्यधारा में लौट चुके हैं
1163 माओवादी गिरफ्तार किए गए हैं
232 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए हैं
आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों ने कार्डेक्स वायर का एक बंडल और 50 जिलेटिन स्टिक स्वेच्छा से सुरक्षा बलों को सौंपे। सभी कैडरों के पुनर्वास और पुनर्समावेशन की विधिक प्रक्रिया जारी है। शासन की नीति के तहत प्रत्येक कैडर को ₹50,000 की तात्कालिक आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।
सुरक्षा बलों की समन्वित कार्रवाई का असर
इस सफलता में DRG, जिला बल, STF, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, कोबरा बटालियन और केरिपु बलों की सक्रिय भूमिका रही। सुरक्षा कैंपों की स्थापना, बेहतर सड़क कनेक्टिविटी और विकास योजनाओं की पहुंच से माओवादी संगठन का प्रभाव क्षेत्र लगातार सिमट रहा है।
बीजापुर पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने अपील करते हुए कहा कि माओवादी भ्रामक विचारधारा को त्यागकर निर्भय होकर मुख्यधारा में लौटें, शासन की ‘पूना मारगेम’ नीति उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य प्रदान करेगी।
वहीं बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. पट्टलिंगम ने कहा कि यह आत्मसमर्पण इस बात का स्पष्ट संकेत है कि माओवादी संगठन अपने अंत की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने शेष माओवादी कैडरों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा—
“हिंसा का मार्ग विनाश की ओर ले जाता है, जबकि ‘पूना मारगेम’ शांति, सम्मान और नए जीवन का रास्ता दिखाता है। हथियार छोड़िए, मुख्यधारा में लौटिए।
“पूना मारगेम” से बदली तस्वीर: राष्ट्रपति के बस्तर आगमन पर 30 इनामी माओवादियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता, ₹85 लाख के थे इनाम