नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के कैंपस में 29 जनवरी की रात उस समय तनावपूर्ण माहौल बन गया, जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी (UGC) के नए इक्विटी नियमों पर लगाई गई रोक के विरोध में वामपंथी छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किया। साबरमती हॉस्टल के बाहर हुए इस विरोध प्रदर्शन में करीब 50 छात्रों ने हिस्सा लिया और देर रात तक नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने यूजीसी के नए नियमों पर लगी रोक को सामाजिक न्याय के खिलाफ बताते हुए केंद्र सरकार और न्यायिक फैसले पर सवाल उठाए। इस दौरान छात्रों ने विवादित नारे लगाए और ब्राह्मणवाद का प्रतीकात्मक पुतला दहन भी किया। प्रदर्शन से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
दरअसल, यूजीसी द्वारा हाल ही में विश्वविद्यालयों में इक्विटी कमेटी गठित करने से जुड़े नए नियम लागू किए गए थे। आयोग का तर्क था कि इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति, जेंडर और दिव्यांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने नियमों को अस्पष्ट बताते हुए अगली सुनवाई तक इन पर रोक लगा दी है।
इधर, जनरल कैटेगरी के छात्रों और कुछ संगठनों का आरोप है कि इन नियमों का दुरुपयोग हो सकता है, जबकि वामपंथी छात्र संगठनों का कहना है कि यह फैसला सामाजिक समानता की दिशा में उठाए गए कदम को कमजोर करता है।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने अपने भाषणों में कहा कि इससे पहले भी मंडल आयोग और एससी-एसटी एक्ट जैसे कानूनों का विरोध हुआ था, लेकिन सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष जारी रहा। छात्रों ने मांग की कि यूजीसी के नए नियमों को और अधिक मजबूत किया जाए और इक्विटी कमेटियों को स्वतंत्र रूप से काम करने की छूट दी जाए।
करीब तीन घंटे तक चले इस प्रदर्शन के बाद छात्रों ने इसे शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त कर दिया। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर जेएनयू कैंपस को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।
UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के खिलाफ JNU में बवाल, ब्राह्मणवाद विरोधी नारे, पुतला दहन