बंदूक से किताब तक का सफर: आठ पूर्व नक्सलियों ने पास की 10वीं, भास्कर और ‘डॉ. गीता’ ने हासिल किया प्रथम श्रेणी

जगदलपुर, 2 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सलियों के जीवन में बदलाव की एक तस्वीर सामने आई है। बस्तर संभाग के आठ पूर्व नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल के माध्यम से 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है। खास बात यह है कि सभी परीक्षार्थियों ने पहली ही कोशिश में सफलता हासिल की, जबकि इनमें कुछ ने प्रथम श्रेणी भी प्राप्त की है।

परीक्षा पास करने वालों में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी से जुड़े रहे भास्कर का नाम भी शामिल है। उन्होंने प्रथम श्रेणी से 10वीं पास की है। आत्मसमर्पण के बाद उन्होंने पढ़ाई को आगे बढ़ाने का फैसला किया और अब आगे की शिक्षा जारी रखने की तैयारी है।

इन आठ सफल परीक्षार्थियों में छह बस्तर जिले के हैं, जबकि कांकेर और बीजापुर से एक-एक व्यक्ति शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले लोगों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

‘डॉ. गीता’ ने भी प्रथम श्रेणी हासिल की

परीक्षा पास करने वालों में 35 वर्षीय गीता नरोटे भी शामिल हैं। मूल रूप से महाराष्ट्र के गढ़चिरौली की रहने वाली गीता ने पारिवारिक परिस्थितियों के चलते छठी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। इसके बाद वह लंबे समय तक नक्सली संगठन में रहीं।

संगठन में रहते हुए घायल साथियों की देखभाल के दौरान उन्होंने प्राथमिक चिकित्सा से जुड़ी कई व्यावहारिक जानकारियां हासिल कीं। इसी वजह से उन्हें संगठन के भीतर ‘डॉक्टर गीता’ के नाम से जाना जाता था। आत्मसमर्पण के बाद उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की और 10वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। अब उनकी इच्छा आगे पढ़कर नर्सिंग के क्षेत्र में जाने की है।

भास्कर ने भी पढ़ाई को बनाया आगे बढ़ने का रास्ता

तेलंगाना निवासी भास्कर 1990 के दशक में नक्सली संगठन से जुड़े थे और बाद में दंडकारण्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों तक पहुंचे। बस्तर में लंबे समय तक रहने के दौरान उन्हें हिंदी और पढ़ाई में रुचि हुई। आत्मसमर्पण के बाद उन्होंने ओपन स्कूल के जरिए अपनी शिक्षा फिर शुरू की और 10वीं में प्रथम श्रेणी हासिल की।

भास्कर अब आगे पढ़ाई जारी रखने के साथ अपने गांव और समुदाय के युवाओं को शिक्षा के लिए प्रेरित करना चाहते हैं।

कांकेर की सन्नू ने भी 10वीं की परीक्षा सफलतापूर्वक पास की है। संगठन से जुड़ने के बाद उन्होंने कैडरों को प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी संभाली थी। आत्मसमर्पण के बाद शिक्षा की ओर लौटते हुए उन्होंने परीक्षा दी और अब आगे पढ़ने की इच्छा जताई है।

इन कहानियों में शिक्षा के जरिए आत्मसमर्पण करने वाले लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने और उनके लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने की कोशिश भी दिखाई देती है।

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