मुंबई, 1 अक्टूबर 2026। मुंबई के मलाड इलाके से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक परिवार ने 80 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के बाद उनके शव का अंतिम संस्कार नहीं किया, बल्कि करीब चार साल तक उसे एक पॉलीक्लिनिक के फ्रीजर में सुरक्षित रखा। परिवार को उम्मीद थी कि आधुनिक तकनीक की मदद से भविष्य में उन्हें दोबारा जीवित किया जा सकता है।
पुलिस के अनुसार, बुजुर्ग की प्राकृतिक मौत वर्ष 2022 में हुई थी। परिवार ने उनके शव को सुरक्षित रखने के लिए ऑनलाइन जानकारी जुटाई और अमेरिका में क्रायोनिक्स की सुविधा देने वाले संगठनों से संपर्क किया। परिवार शव को अमेरिका भेजने की प्रक्रिया पर भी काम कर रहा था।
क्रायोनिक्स के जरिए पुनर्जीवन की उम्मीद
परिवार का कहना है कि वे बुजुर्ग को खोने के बाद बेहद भावुक थे और शव को संरक्षित रखना चाहते थे। इसी दौरान उन्हें क्रायोनिक्स के बारे में जानकारी मिली। इस प्रक्रिया में कानूनी रूप से मृत व्यक्ति के शरीर को बेहद कम तापमान पर संरक्षित रखने की कोशिश की जाती है। हालांकि, इंसानी शव को इस तरह संरक्षित करके भविष्य में दोबारा जीवित करने की तकनीक अभी वैज्ञानिक रूप से स्थापित उपचार नहीं है।
बंद पड़े क्लिनिक में मिला शव
पुलिस को सोमवार रात सूचना मिलने के बाद मलाड के एक पॉलीक्लिनिक में जांच की गई। क्लिनिक पिछले करीब एक महीने से मरम्मत के कारण बंद था। तलाशी के दौरान पुलिस को फ्रीजर में बुजुर्ग का शव मिला।
पूछताछ में परिवार ने बुजुर्ग की वर्ष 2022 में हुई प्राकृतिक मौत से जुड़े दस्तावेज पुलिस को दिखाए। परिवार के सदस्यों ने यह भी बताया कि वे शव को अमेरिका भेजने के लिए संबंधित संस्था से बातचीत कर रहे थे और भारत में इसके कानूनी पहलुओं को लेकर वकीलों से सलाह भी ली थी।
मकान मालिक को भी नहीं थी जानकारी
पुलिस के मुताबिक, शव को क्लिनिक में रखने की जानकारी न तो मकान मालिक को थी और न ही स्थानीय पुलिस को। मकान मालिक ने बताया कि वह और उसका परिवार जरूरत पड़ने पर इसी क्लिनिक में इलाज कराने आते थे, लेकिन उन्हें फ्रीजर में शव रखे होने की कोई जानकारी नहीं थी।
फिलहाल पुलिस ने परिवार, क्लिनिक प्रबंधन और मकान मालिक के बयान दर्ज कर लिए हैं। शव के अंतिम संस्कार को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। पुलिस मामले के कानूनी पहलुओं की जांच कर रही है।