महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर संयुक्त ऑपरेशन में दो आरोपी दबोचे गए, पैंगोलिन के शल्क भी बरामद; इंद्रावती–अबूझमाड़ में बाघों के शिकार की आशंका
गरियाबंद, 1 जुलाई। मध्य भारत के सबसे महत्वपूर्ण बाघ गलियारों में सक्रिय वन्यजीव तस्करों के खिलाफ चलाए गए ‘ऑपरेशन सेफ पैसेज’ में वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) की एंटी-पोचिंग टीम ने एक अंतर्राज्यीय वन्यजीव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को दो बाघों की खाल के साथ गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी पुलिस विभाग से जुड़े कर्मचारी हैं, जिससे मामला और भी गंभीर हो गया है।
यह कार्रवाई उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी-पोचिंग टीम, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) के केंद्रीय और पश्चिमी क्षेत्र, राज्य स्तरीय फ्लाइंग स्क्वॉड, पश्चिम भानुप्रतापपुर वन मंडल तथा गरियाबंद पुलिस की संयुक्त टीम ने की।
मोटरसाइकिल पर ले जा रहे थे दो बाघों की खाल
संयुक्त टीम ने महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर घेराबंदी कर बाबूराव मडावी और बिजेश्वर गेडाम को गिरफ्तार किया। दोनों एक मोटरसाइकिल पर सवार थे और उनके कब्जे से दो बाघों की खाल बरामद की गई। मामले में पश्चिम पारलकोट परिक्षेत्र, पश्चिम भानुप्रतापपुर वन मंडल, जिला कांकेर में वन अपराध प्रकरण क्रमांक 390/09 दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
घर से बरामद हुए पैंगोलिन के शल्क
पूछताछ के दौरान आरोपी बिजेश्वर गेडाम ने कई अहम खुलासे किए। उसकी निशानदेही पर महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के अहेरी स्थित उसके घर में छापेमारी की गई, जहां से बड़ी मात्रा में पैंगोलिन (सालखोर) के शल्क बरामद हुए। इससे जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह गिरोह केवल बाघों की तस्करी तक सीमित नहीं था, बल्कि कई दुर्लभ वन्यजीवों की अवैध तस्करी में भी शामिल था।
इंद्रावती–अबूझमाड़ में किया गया था शिकार
प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि जिन दो बाघों की खाल बरामद हुई है, उनका शिकार इंद्रावती टाइगर रिजर्व–अबूझमाड़ लैंडस्केप में किया गया था। अब वन विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि इस शिकार और तस्करी के नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
400 किलोमीटर लंबे बाघ कॉरिडोर की सुरक्षा को मिली मजबूती
वन अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई गढ़चिरौली–इंद्रावती–अबूझमाड़–उदंती-सीतानदी–सुनाबेड़ा को जोड़ने वाले करीब 400 किलोमीटर लंबे वन्यजीव कॉरिडोर की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह कॉरिडोर महाराष्ट्र के बाघों को छत्तीसगढ़ और ओडिशा के जंगलों तक सुरक्षित पहुंचाने वाला प्राकृतिक मार्ग है।
इसी रास्ते से बाघ नए क्षेत्रों में अपना विस्तार करते हैं। इसके अलावा यह कॉरिडोर एशियाई हाथी, गौर (भारतीय बाइसन), जंगली भैंसा समेत कई दुर्लभ वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन और उनकी आनुवंशिक विविधता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
पहले भी मिल चुकी हैं बड़ी सफलताएं
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी-पोचिंग टीम इससे पहले भी कई बड़े शिकारी गिरोहों का भंडाफोड़ कर चुकी है। वर्ष 2023 में महाराष्ट्र और बीजापुर में चलाए गए दो संयुक्त अभियानों में अंतर्राज्यीय शिकारी गिरोह के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था और दो बाघों की खाल बरामद की गई थी।
इसके अलावा अप्रैल 2026 में अबूझमाड़ क्षेत्र में 9 विशाल भारतीय गिलहरियों (इंडियन जायंट स्क्विरल) का शिकार करने वाले आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया था।
वन विभाग ने दोहराई ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
वन विभाग ने कहा है कि ऑपरेशन ‘सेफ पैसेज’ इस बात का प्रमाण है कि मजबूत खुफिया तंत्र, विभिन्न एजेंसियों के बेहतर समन्वय और वैज्ञानिक रणनीति के जरिए संगठित वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि बाघों और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से गढ़चिरौली–इंद्रावती–अबूझमाड़–उदंती-सीतानदी–सुनाबेड़ा वन्यजीव कॉरिडोर में भविष्य में भी लगातार एंटी-पोचिंग अभियान चलाए जाएंगे और वन्यजीव अपराधों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।