आगरा4सितम्बर 2026/शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तार आरोपी की रिमांड मांगना पुलिस को भारी पड़ गया। अदालत में विवेचक गिरफ्तारी के स्पष्ट कारण और आधार नहीं बता सके। गिरफ्तारी मेमो में भी इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलने पर प्रभारी विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-1 मो. साजिद ने पुलिस का रिमांड प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया। अदालत ने आरोपी को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। साथ ही विवेचक उप निरीक्षक आलोक कुमार से सात दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।
15 दिन की रिमांड मांगने पहुंची थी पुलिस
थाना शाहगंज में मुरली विहार कॉलोनी निवासी सनी के खिलाफ शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने आरोपी को दो सितंबर को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। विवेचक ने विवेचना आगे बढ़ाने के लिए 15 दिन की रिमांड मांगी थी।
आरोपी के अधिवक्ता ने रिमांड प्रार्थनापत्र पर आपत्ति दाखिल करते हुए कहा कि गिरफ्तारी के समय और अदालत में पेश करने से पहले आरोपी को गिरफ्तारी के कारण और आधार की जानकारी न तो मौखिक रूप से दी गई और न ही लिखित रूप में।
गिरफ्तारी मेमो में भी नहीं मिला स्पष्ट कारण
अदालत के समक्ष यह भी सामने आया कि गिरफ्तारी मेमो में गिरफ्तारी के आधार का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था। वहीं ‘कारण गिरफ्तारी’ संबंधी प्रपत्र में विवेचक ने केवल इतना दर्ज किया कि आरोपी को मुकदमे में गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी का कोई विशिष्ट कारण उसमें दर्ज नहीं था।
अदालत ने इस पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि गिरफ्तारी के कारण और आधार को लिखित रूप में स्पष्ट न करना प्रथम दृष्टया अवैधानिक है। इसके बाद अदालत ने पुलिस का रिमांड प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया और आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
अदालत ने विवेचक आलोक कुमार से सात दिन के भीतर इस पूरी कार्रवाई को लेकर स्पष्टीकरण भी मांगा है।