बिहटा की इस सड़क पर हर कदम खतरे से खाली नहीं! गड्ढों में भरा पानी, राहगीर परेशान; लोगों की विधायक से गुहार—‘एक बार आकर देख लीजिए’

बिहटा (पटना): 4सितम्बर 2026/पटना से सटे बिहटा में नेउरागंज से टिकैतपुर होते हुए सराय तक जाने वाली करीब दो से तीन किलोमीटर लंबी सड़क इन दिनों बदहाली की तस्वीर बनी हुई है। सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढे और बारिश के बाद जमा पानी राहगीरों के लिए मुसीबत बन गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की खराब हालत के कारण आए दिन हादसे का खतरा बना रहता है।

बारिश ने बढ़ाई परेशानी, पानी में छिपे गड्ढे बन रहे खतरा

सड़क की स्थिति बारिश के बाद और भी खराब हो जाती है। जगह-जगह गड्ढों में पानी भर जाने के कारण वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा नहीं लग पाता। अचानक गड्ढे सामने आने से खासकर बाइक और टेंपो चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका बनी रहती है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई राहगीर इन गड्ढों में गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं। रात के समय कम रोशनी और सड़क पर जमा पानी के कारण खतरा और बढ़ जाता है।

कई शिक्षण संस्थानों को जोड़ती है यह सड़क

नेउरागंज-टिकैतपुर-सराय मार्ग सिर्फ ग्रामीण इलाकों को जोड़ने वाली सड़क नहीं है, बल्कि यह बिहटा-खगौल नेशनल हाईवे और पटना-बक्सर फोरलेन से भी जुड़ती है। इसी रास्ते से इंजीनियरिंग कॉलेज, बीएड कॉलेज समेत कई शिक्षण संस्थानों तक विद्यार्थी और शिक्षक रोजाना आते-जाते हैं।

सड़क की बदहाली के कारण विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्थानीय लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि खराब सड़क के कारण यात्रा में अतिरिक्त समय लग रहा है और वाहनों को भी नुकसान पहुंच रहा है।

सोशल मीडिया पर विधायक से लगाई गुहार

सड़क की बदहाली को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए मनेर विधायक भाई वीरेंद्र से भी इस समस्या का संज्ञान लेने की अपील की है। स्थानीय लोगों की अपील है—“हमारे विधायक जी, बस एक बार आकर देख लीजिए।”

लोगों की मांग—जल्द हो सड़क की मरम्मत

ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों से सड़क का निरीक्षण कराकर जल्द मरम्मत कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि गड्ढों को भरने के साथ जलजमाव की समस्या का भी स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, सड़क की मरम्मत होने से आवागमन सुगम होगा और बारिश के दौरान होने वाले हादसों का खतरा भी कम किया जा सकेगा। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि इस समस्या पर कब तक कार्रवाई करते हैं।

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