दंतेवाड़ा के ‘खजाने’ से बदलेगी बस्तर की तस्वीर: DMF की रकम से जंगलों तक पहुंचेगी सड़क, बिजली और पानी; चार जिलों को मिलेगा बड़ा फायदा

रायपुर। 31अगस्त 2026/दशकों से माओवादी हिंसा से प्रभावित बस्तर में अब विकास की नई राह खुलती नजर आ रही है। केंद्र सरकार ने लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म (LWE) प्रभावित क्षेत्रों के लिए जिला खनिज न्यास निधि (DMF) के नियमों में विशेष छूट दी है। इससे खनिज संपदा वाले जिलों में जमा होने वाली DMF की राशि अब दूरदराज के संवेदनशील और पिछड़े इलाकों के विकास पर भी खर्च की जा सकेगी।

15 से 25 किलोमीटर की सीमा खत्म

अब तक DMF की राशि का इस्तेमाल खनन क्षेत्र से 15 से 25 किलोमीटर के दायरे में ही किया जा सकता था। इस भौगोलिक सीमा के कारण बस्तर के कई दूरस्थ और संवेदनशील इलाकों तक विकास की राशि पहुंचाना मुश्किल था। नई व्यवस्था के बाद यह सीमा प्रभावी रूप से समाप्त हो गई है।

यह विशेष व्यवस्था वित्तीय वर्ष 2027-28 तक लागू रहेगी। इसका सीधा लाभ बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर जिलों को मिलेगा। इन क्षेत्रों में अब सड़क, पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए DMF की राशि का उपयोग किया जा सकेगा।

दंतेवाड़ा के DMF फंड का 50 फीसदी चार जिलों को

राज्य को हर साल कोरबा से करीब 700 करोड़ रुपये और दंतेवाड़ा से लगभग 600 करोड़ रुपये DMF के रूप में मिलते हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य में कुल 16,738 करोड़ रुपये का खनिज राजस्व जुटाया गया था। अगले वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा 19,000 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है।

भौमिकी एवं खनिकर्म विभाग के संचालक रजत बंसल के अनुसार, दंतेवाड़ा के कुल DMF फंड का 50 प्रतिशत हिस्सा अब बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा और कांकेर को वितरित किया गया है। इससे इन जिलों के दूरस्थ क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।

सुरक्षा के साथ विकास पर सरकार का जोर

बस्तर में माओवादी गतिविधियों में कमी आने के बाद अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और लोगों का भरोसा मजबूत करना है। सिर्फ सुरक्षा कैंप स्थापित करने के बजाय गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना भी जरूरी माना जा रहा है।

सड़क और बिजली के साथ पेयजल, 4G/5G नेटवर्क, पोर्टा केबिन स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार बस्तर के विकास में अहम भूमिका निभा सकता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पहले ही 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले बस्तर के हर गांव तक विकास की रोशनी पहुंचाने का लक्ष्य बता चुके हैं। ऐसे में DMF नियमों में मिली यह विशेष छूट बस्तर के दूरस्थ इलाकों के लिए विकास की बड़ी संभावनाएं खोल सकती है।

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