चेन्नई/कांचीपुरम। 24अगस्त 2026/साड़ी भारत की पहचान और कला का खूबसूरत संगम मानी जाती है, लेकिन क्या आपने कभी ऐसी साड़ी के बारे में सुना है, जो करीब 8 किलो वजनी हो और जिस पर 11 मशहूर पेंटिंग्स के साथ सोना, हीरे और कीमती रत्न जड़े हों? यह अनोखी ‘विवाह पट्टू’ साड़ी अपनी भव्यता और बारीक कारीगरी के कारण दुनिया की सबसे महंगी सिल्क साड़ियों में गिनी जाती है।
4,760 घंटे में तैयार हुई साड़ी
कांचीपुरम में तैयार की गई इस खास साड़ी को बनाने में करीब 4,760 घंटे लगे। इसकी बुनाई में सामान्य तकनीक के बजाय डबल रैप बुनाई तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इसमें धागों की दो परतों के जरिए अलग-अलग रंगों को इस तरह बुना गया कि डिजाइन और तस्वीरें कपड़े का ही हिस्सा बन गईं। यानी इन तस्वीरों को बाद में प्रिंट नहीं किया गया।
साड़ी पर बुनी गईं राजा रवि वर्मा की 11 पेंटिंग्स
इस साड़ी की सबसे बड़ी खासियत इसका अनोखा आर्टवर्क है। इसमें मशहूर भारतीय चित्रकार राजा रवि वर्मा की 11 प्रसिद्ध पेंटिंग्स से प्रेरित डिजाइनों को सिल्क के धागों से बुना गया है। साड़ी के पल्लू पर उनकी चर्चित पेंटिंग ‘गैलेक्सी ऑफ म्यूजिशियन्स’ का दृश्य भी शामिल है, जिसमें महिलाएं पारंपरिक वाद्ययंत्र बजाती नजर आती हैं।
सोना, हीरे और कई कीमती रत्नों से सजावट
विवाह पट्टू साड़ी में करीब 59.7 ग्राम सोना, 3.913 कैरेट हीरे, 120 मिलीग्राम प्लैटिनम और 5 ग्राम चांदी का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा रूबी, पन्ना, नीलम, कैट्स आई, टोपाज, मोती और मूंगा जैसे कीमती रत्न भी लगाए गए हैं। यही वजह है कि यह साड़ी किसी सामान्य परिधान से ज्यादा एक बेशकीमती कलाकृति जैसी दिखाई देती है।
करीब 8 किलो है वजन
सोने, हीरे और रत्नों के कारण इस साड़ी का वजन करीब 8 किलो बताया जाता है। खास बात यह है कि इसे केवल प्रदर्शनी के लिए नहीं, बल्कि पहनने और ड्रेप करने को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था।
लाखों में हुई थी बिक्री
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, इस साड़ी ने सबसे महंगी सिल्क साड़ी के रिकॉर्ड के रूप में पहचान बनाई। वर्ष 2007 में तैयार हुई पहली साड़ी को 5 जनवरी 2008 को बेंगलुरु के एक कारोबारी ने अपनी पत्नी को शादी की 10वीं सालगिरह पर उपहार दिया था। इसके एक अन्य संस्करण को कथित तौर पर कुवैत के एक कारोबारी ने करीब 40 लाख रुपये में खरीदा था।
यानी यह साड़ी सिर्फ रेशम, सोने और हीरों का मेल नहीं, बल्कि भारतीय बुनाई, चित्रकला और शिल्पकला का ऐसा अनोखा संगम है, जिसे तैयार करने में हजारों घंटे की मेहनत लगी।