IGKV पेपर लीक का बड़ा खुलासा: बंद लिफाफे को भी नहीं छोड़ा, एंडोस्कोपिक कैमरे से स्कैन कर WhatsApp पर भेजा पेपर; प्रोफेसर समेत 6 गिरफ्तार

रायपुर, 22 अगस्त 2026। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के बीएससी एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष के प्रश्नपत्र लीक मामले में रायपुर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। परीक्षा शुरू होने से करीब दो घंटे पहले WhatsApp पर वायरल हुए प्रश्नपत्र की जांच के बाद पुलिस ने दुर्ग के भारती कॉलेज के प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया समेत 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में प्रोफेसर के अलावा पांच छात्र शामिल हैं। आरोप है कि छात्रों ने लीक हुआ प्रश्नपत्र 12-12 हजार रुपये में खरीदा था।

बंद लिफाफे के अंदर का पेपर ऐसे किया गया स्कैन

मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि प्रश्नपत्र को लिफाफा खोलकर बाहर नहीं निकाला गया। पुलिस जांच के अनुसार आरोपियों ने एंडोस्कोपिक कैमरे का इस्तेमाल कर बंद लिफाफे के अंदर रखे प्रश्नपत्र को स्कैन किया और उसकी तस्वीरें हासिल कीं।

इसके बाद प्रश्नपत्र की कॉपी तैयार कर उसे आगे छात्रों तक पहुंचाया गया। परीक्षा शुरू होने से करीब दो घंटे पहले यही पेपर WhatsApp पर वायरल हो गया।

प्रोफेसर की भूमिका पर पुलिस की नजर

जांच के दौरान दुर्ग के भारती कॉलेज के प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। पुलिस का आरोप है कि लीक हुआ प्रश्नपत्र आगे छात्रों तक पहुंचाया गया, जिसे पांच छात्रों ने पैसे देकर खरीदा।

असली परीक्षा पेपर से हुआ मिलान

परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र बांटे जाने के बाद जब वायरल WhatsApp पेपर और वास्तविक प्रश्नपत्र का मिलान किया गया, तो दोनों एक ही निकले। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया और मामले की शिकायत पुलिस से की गई।

अब पूरे नेटवर्क की जांच

रायपुर क्राइम पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र आरोपियों तक किस स्तर से पहुंचा, बंद लिफाफे को स्कैन करने की योजना किसने बनाई और WhatsApp के जरिए प्रश्नपत्र कितने लोगों तक पहुंचाया गया।

पुलिस इस मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

CM ने दिए थे सख्त कार्रवाई के निर्देश

IGKV पेपर लीक मामले को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गंभीरता से लिया था। उन्होंने परीक्षा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से किसी भी तरह का समझौता न करने की बात कहते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय जांच समिति भी गठित की थी।

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