जगदलपुर, 20अगस्त 2026। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को कम लागत में टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ने के उद्देश्य से ग्राम कुम्हरावंड में 19अगस्त को जागरूकता सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। शहीद गुण्डाधुर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र के ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (रावे) कार्यक्रम के तहत आयोजित इस प्रशिक्षण में किसानों को जीवामृत, बीजामृत तथा प्राकृतिक कीट नियंत्रकों के निर्माण और उपयोग की व्यावहारिक जानकारी दी गई।
महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आर. एस. नेताम के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में रावे विद्यार्थियों और कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के समक्ष ड्रम में जीवामृत तैयार करने का सजीव प्रदर्शन किया। विशेषज्ञों ने बताया कि स्थानीय संसाधनों के उपयोग से प्राकृतिक खेती अपनाकर खेती की लागत को कम करने के साथ मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण का संरक्षण किया जा सकता है।
मृदा वैज्ञानिक डॉ. थानेश्वर देवांगन ने कहा कि मिट्टी के स्वास्थ्य और उसकी दीर्घकालिक उर्वरता को बनाए रखने के लिए प्राकृतिक खेती समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. जीवन लाल सलाम ने जीवामृत की उपयोगिता बताते हुए कहा कि गोबर, गोमूत्र, बेसन और गुड़ से तैयार जीवामृत मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता बढ़ाने में सहायक होता है।
वहीं डॉ. नीता मिश्रा ने किसानों को खेतों में जीवामृत के उचित प्रयोग और छिड़काव की तकनीकी जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने बीजों के प्राकृतिक शोधन के लिए बीजामृत तैयार करने की विधि भी बताई। इसके अलावा रासायनिक कीटनाशकों के विकल्प के रूप में अग्न्यास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे प्राकृतिक कीट नियंत्रकों को तैयार करने की प्रक्रिया का भी प्रदर्शन किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. चेतना खांडेकर, डॉ. खुशबू टंडन सहित बड़ी संख्या में गौपालक और स्थानीय किसान उपस्थित रहे। किसानों ने प्रशिक्षण में उत्साहपूर्वक भाग लिया और प्राकृतिक कृषि तकनीकों को अपने खेतों में अपनाने की प्रतिबद्धता जताई। कार्यक्रम ने किसानों को स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, कम लागत वाली खेती और स्वस्थ मिट्टी की दिशा में आगे बढ़ने का व्यावहारिक मार्ग दिखाया।