नई दिल्ली/धार। 31 जुलाई 2026/ मध्य प्रदेश के धार स्थित बहुचर्चित भोजशाला-कमाल मौला परिसर विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि विवादित परिसर से सटी दरगाह की भूमि (खसरा नंबर 596) पर मुस्लिम समुदाय को प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक जुमे की नमाज अदा करने की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि संबंधित भूमि विवादित परिसर के निकट स्थित है तथा वहां तक अलग पहुंच मार्ग भी उपलब्ध है, इसलिए इसे नमाज के लिए उपयुक्त स्थान माना जा सकता है। अदालत ने राज्य सरकार को आवश्यक सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने अदालत को बताया कि प्रशासन द्वारा पहले चिन्हित किया गया वैकल्पिक स्थल भोजशाला परिसर से काफी दूर था, जिससे अंतरिम व्यवस्था का उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने परिसर से लगी दरगाह की भूमि को नमाज के लिए उपयुक्त विकल्प मानते हुए नया आदेश जारी किया।
यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जहां मुस्लिम पक्ष मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 15 मई 2026 के फैसले को चुनौती दे रहा है। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में भोजशाला-कमाल मौला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर माना था तथा वर्ष 2003 के उस आदेश को निरस्त कर दिया था, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को परिसर में शुक्रवार की नमाज की अनुमति प्राप्त थी।
गौरतलब है कि विवाद की शुरुआत धार्मिक स्वरूप के वैज्ञानिक सर्वे की मांग को लेकर दायर याचिका के बाद हुई थी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट में परिसर के निर्माण को पूर्ववर्ती मंदिरों के अवशेषों से जुड़ा बताया गया था। इसी रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह केवल अंतरिम व्यवस्था है और मामले का अंतिम निर्णय अभी शेष है। साथ ही अदालत ने एएसआई को निर्देश दिया है कि वह विवादित स्मारक में किसी भी प्रकार का संरचनात्मक परिवर्तन बिना न्यायालय की अनुमति के नहीं करेगा। अब सभी पक्षों की दलीलों के बाद इस संवेदनशील और ऐतिहासिक मामले में अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।