जगदलपुर, 15 जुलाई 2026। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता अब महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रही है। बस्तर के जगदलपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम मांझीगुडा की निवासी श्रीमती चंदा ने योजना से प्राप्त राशि का उपयोग गोंचा पर्व में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक तुपकी के निर्माण में किया है। इससे न केवल उनकी आय बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक परंपरा को भी नई मजबूती मिल रही है।
चंदा अपने पति चिगडू और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर गोंचा पर्व के लिए बड़ी संख्या में तुपकियां तैयार कर रही हैं। पर्व के दौरान इनकी मांग काफी अधिक रहती है, जिससे परिवार को अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। तुपकी बांस से बनाई जाने वाली पारंपरिक वस्तु है, जिसमें मलाग्नी पेड़ के बीज (पेंगू) का उपयोग कर बंदूक जैसी आवाज उत्पन्न की जाती है।
बस्तर के प्रसिद्ध गोंचा पर्व में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान श्रद्धालु तुपकी की ध्वनि के माध्यम से रथ को पारंपरिक सलामी देते हैं। यह परंपरा वर्षों से बस्तर की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रही है।
चंदा बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से हर महीने मिलने वाली राशि ने उन्हें आर्थिक आत्मविश्वास दिया है। इसी मदद से उन्होंने तुपकी निर्माण के लिए बांस और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदी। अब पूरा परिवार इस कार्य में जुटा है और पर्व के दौरान अच्छी बिक्री की उम्मीद कर रहा है।
उनका कहना है कि महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और अपने पारंपरिक कौशल को आजीविका से जोड़ने का अवसर भी दे रही है। चंदा की पहल इस बात का उदाहरण है कि जब सरकारी योजनाएं स्थानीय संस्कृति और लोगों के हुनर से जुड़ती हैं, तो वे आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का भी माध्यम बन जाती हैं।