मोर गांव-मोर पानी’ बना जनआंदोलन: 200 लाख लीटर भू-जल रिचार्ज क्षमता विकसित, जल संरक्षण को मिली नई रफ्तार

रायपुर, 12 जुलाई। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है। विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (VB-G RAM-G) के तहत प्रदेशभर में रोजगार सृजन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, जल संरक्षण और हरित विकास के कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान के माध्यम से लाखों मानव-दिवस का रोजगार सृजित होने के साथ ही जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कर भू-जल संवर्धन को नई दिशा मिली है।
इसी कड़ी में मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के जनपद पंचायत खड़गवां अंतर्गत ग्राम पंचायत बरदर में ‘मोर गांव-मोर पानी’ जनभागीदारी कार्यक्रम एवं ‘एक पेड़ मां के नाम’ वृहद वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने वृक्षारोपण कर अभियान की शुरुआत की और स्वयं कंटूर ट्रेंच की खुदाई कर जल संरक्षण का संदेश दिया।
ग्राम पंचायत बरदर में 52 एकड़ क्षेत्र में समेकित जल संरक्षण एवं हरित विकास मॉडल विकसित किया जा रहा है। इसमें 30 एकड़ क्षेत्र में कंटूर ट्रेंच सहित विभिन्न जल संरक्षण कार्य किए जा रहे हैं, जबकि 22 एकड़ क्षेत्र में लगभग 2,000 फलदार एवं अन्य पौधों का रोपण किया जा रहा है।
अभियान के तहत किए गए कार्यों से क्षेत्र में लगभग 200 लाख लीटर भू-जल रिचार्ज क्षमता विकसित हुई है, जिससे भविष्य में सिंचाई, पेयजल उपलब्धता, कृषि उत्पादकता और पर्यावरण संरक्षण को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार का लक्ष्य जनभागीदारी के माध्यम से प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत को जल-सुरक्षित, हरित और आत्मनिर्भर बनाना है। ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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