हमारा पानी, हमारा हक” : मुन्नेरु–पालेरु लिंक कैनाल के खिलाफ जनता का बड़ा आंदोलन, 95% लोगों ने परियोजना खारिज की

15मई2026

तेलंगाना के महबूबाबाद जिले के गार्ल मंडल में प्रस्तावित मुन्नेरु–पालेरु लिंक कैनाल परियोजना को लेकर लोगों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। राज्य सरकार की इस योजना के खिलाफ अब किसान, आदिवासी समुदाय, सामाजिक संगठन, बुद्धिजीवी और विभिन्न राजनीतिक दल एक मंच पर आ गए हैं। लोगों का आरोप है कि सरकार विकास के नाम पर स्थानीय जल स्रोतों और ग्रामीणों के अधिकारों की अनदेखी कर रही है। इसी मुद्दे को लेकर आयोजित एक ऑनलाइन जनमत संग्रह में भारी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और परियोजना को रद्द करने की मांग की।
तेलंगाना विद्यावंतुल वेदिका के राज्य उपाध्यक्ष एवं अधिवक्ता विश्व जंपाला के नेतृत्व में 14 अप्रैल से 15 मई तक ऑनलाइन सर्वे कराया गया। सर्वे के नतीजे शुक्रवार को गार्ल मंडल स्थित अमरवीर स्मारक के पास सार्वजनिक किए गए। सर्वे में कुल 651 लोगों ने भाग लिया, जिनमें से लगभग 95 प्रतिशत लोगों ने साफ तौर पर कहा कि मुन्नेरु–पालेरु लिंक कैनाल परियोजना को रद्द किया जाना चाहिए। केवल कुछ लोगों ने ही इस योजना का समर्थन किया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गार्ल और आसपास के इलाकों में पहले से पानी की भारी समस्या है। कई तालाब सूख चुके हैं और भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। ऐसे में मुन्नेरु नदी का पानी दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचाने की योजना ग्रामीणों के हितों के खिलाफ बताई जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि यही पानी स्थानीय जलाशयों और खेती के लिए इस्तेमाल किया जाए तो हजारों एकड़ भूमि को सिंचाई मिल सकती है और पेयजल संकट भी कम हो सकता है।
परियोजना का विरोध कर रहे लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार एजेंसी क्षेत्रों की अनदेखी कर रही है। आंदोलनकारियों का कहना है कि आदिवासी इलाकों की जमीन और संसाधनों पर बिना सहमति के फैसले लेना पेसा कानून की भावना के खिलाफ है। ग्रामीणों ने मांग की कि लिंक कैनाल बनाने के बजाय मुन्नेरु नदी पर स्थायी रिजर्वायर बनाया जाए, जिससे स्थानीय किसानों और गांवों को सीधा लाभ मिल सके।
सर्वे रिपोर्ट सामने आने के बाद गार्ल मंडल में आंदोलन और तेज हो गया। लोगों ने हाथों में पोस्टर और सर्वे की प्रतियां लेकर प्रदर्शन किया तथा “मुन्नेरु जल दोहन बंद करो” और “स्थानीय अधिकारों की रक्षा करो” जैसे नारे लगाए। आंदोलनकारियों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जनता की राय को नजरअंदाज किया गया तो आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
इस दौरान मुन्नेरु जल साधन समिति के संयोजक गंगावत लक्ष्मण नायक, CPI नेता कट्टेबोयिन श्रीनिवास सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह लड़ाई केवल पानी की नहीं, बल्कि उनके अधिकार और अस्तित्व की भी है।

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