7मई2026
जगदलपुर। बस्तर जिले के कलचा गांव की रहने वाली तुलसा बघेल आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरी हैं। सीमित संसाधनों और पारंपरिक खेती के सहारे जीवन यापन करने वाली तुलसा ने अपनी मेहनत, लगन और आधुनिक खेती की तकनीकों के जरिए न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति बदली, बल्कि आत्मनिर्भरता की मिसाल भी पेश की है।
कुछ साल पहले तक तुलसा वर्षा पर निर्भर खेती करती थीं। सिंचाई की सुविधा नहीं होने और खेती की नई जानकारी के अभाव में उन्हें ज्यादा फायदा नहीं मिल पाता था। इसी दौरान उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर नई शुरुआत की। समूह के माध्यम से उन्हें खेती के आधुनिक तरीकों की जानकारी मिली और आत्मविश्वास भी बढ़ा।
तुलसा ने सबसे पहले 7 हजार रुपए का छोटा ऋण लेकर अपनी बाड़ी को विकसित करना शुरू किया। कृषि विभाग और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में उन्होंने मचान पद्धति और लाइन कतार तकनीक अपनाई, जिससे उत्पादन में अच्छा सुधार देखने को मिला। खेती से होने वाली आमदनी बढ़ने के बाद उन्होंने बैंक लिंकेज के जरिए 60 हजार रुपए का ऋण लिया और खेत में बोरवेल लगवाया। इस फैसले ने उनकी खेती को नई दिशा दी और अब वे सालभर सब्जियों की खेती करने लगी हैं।
वर्तमान में तुलसा अपने खेत में पत्ता गोभी, मटर और भिंडी जैसी फसलों का उत्पादन कर अच्छी आमदनी हासिल कर रही हैं। आगामी खरीफ सीजन के लिए उन्होंने तोरई, खीरा और भिंडी की तैयारी भी शुरू कर दी है। खेती से हुए मुनाफे से उन्होंने अपने कच्चे घर को पक्का बनवाया और परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करना शुरू किया है। अब वे अपनी बेटी की शादी की तैयारी भी कर रही हैं।
तुलसा बघेल का सपना केवल खेती तक सीमित नहीं है। वे आने वाले समय में मुर्गी पालन शुरू कर आय के नए स्रोत तैयार करना चाहती हैं। उनका मानना है कि अगर सही मार्गदर्शन, मेहनत और योजनाओं का लाभ मिले तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
एक साधारण मजदूर से सफल महिला किसान बनने तक का तुलसा का सफर यह साबित करता है कि तकनीक और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग ग्रामीण जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।