3मई 2026
जगदलपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने शहीद गुण्डाधुर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, जगदलपुर का दौरा कर संस्थान की शैक्षणिक, अधोसंरचनात्मक और अनुसंधान गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने छात्र-छात्राओं की सुविधाओं, बस्तर क्षेत्र की कृषि संभावनाओं और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए।
अपने भ्रमण की शुरुआत कुलपति ने इंद्रावती कन्या छात्रावास से की, जहां निर्माणाधीन अतिरिक्त कक्षों का निरीक्षण करते हुए उन्होंने गुणवत्ता सुधार और बेहतर सुविधाओं के लिए आवश्यक सुझाव दिए। छात्राओं से सीधे संवाद करते हुए उन्होंने अनुशासन, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रसेवा के मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी। विशेष रूप से उन्होंने छात्राओं को एनसीसी से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया और आगामी सत्र तक महाविद्यालय में एनसीसी एयरविंग शुरू करने की घोषणा कर छात्राओं के उत्साह को नई उड़ान दी।
कुलपति ने छात्राओं द्वारा रखी गई समस्याओं और आवश्यकताओं को गंभीरता से सुना तथा महाविद्यालय प्रशासन को त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इससे छात्र कल्याण के प्रति विश्वविद्यालय प्रशासन की संवेदनशीलता स्पष्ट दिखाई दी।
वैज्ञानिकों और अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में डॉ. चंदेल ने बस्तर की विशेष भौगोलिक और कृषि परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय जरूरतों के अनुरूप अनुसंधान को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने वैज्ञानिकों को निर्देशित किया कि क्षेत्र विशेष के लिए उपयुक्त फसल उत्पादन, मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण तकनीकों पर विशेष कार्य किया जाए, जिससे स्थानीय किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सके।
उन्होंने यह भी कहा कि कृषि शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और कृषि प्रसंस्करण के क्षेत्र में दक्ष बनाना आवश्यक है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का बेहतर सामना कर सकें।
दौरे के दौरान शैक्षणिक क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ी, जब डॉ. रोशन परिहार द्वारा लिखित पुस्तक ‘वस्तुनिष्ठ बीज तकनीक’ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिकों, विश्वविद्यालय अधिकारियों और महाविद्यालय परिवार की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया।
कुलपति का यह दौरा बस्तर में कृषि शिक्षा, अनुसंधान, छात्र कल्याण और क्षेत्रीय विकास के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला माना जा रहा है। इससे न केवल संस्थान की विकास यात्रा को गति मिलेगी, बल्कि स्थानीय कृषि व्यवस्था को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।