नक्सल छवि से निकलता बस्तर: दिल्ली की डॉक्टर बोलीं—अब सुरक्षित, लेकिन सुविधाओं पर देना होगा ध्यान

22अप्रैल 2026

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले को लेकर वर्षों से बनी नक्सल प्रभावित क्षेत्र की छवि अब तेजी से बदल रही है। दिल्ली से आई एक डॉक्टर पूर्वी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि यहां आने से पहले उनके मन में डर और आशंका थी, लेकिन दंतेवाड़ा पहुंचने पर उनकी सोच पूरी तरह बदल गई।
डॉक्टर पूर्वी ने कहा कि अब यह इलाका नक्सल प्रभाव से काफी हद तक मुक्त हो चुका है और यहां घूमना सुरक्षित महसूस होता है। उन्होंने ढोलकल के घने जंगलों की सुंदरता की खास तौर पर तारीफ की और बताया कि उन्होंने उत्तराखंड में भी ट्रैकिंग की है, लेकिन बस्तर का प्राकृतिक सौंदर्य अपने आप में अलग और बेहद आकर्षक है।
उन्होंने अपने दौरे के दौरान मामा-भांजा मंदिर, बत्तीस खंभों वाला मंदिर और मां दंतेश्वरी मंदिर के दर्शन किए। इन मंदिरों की अद्भुत नक्काशी और स्थापत्य कला ने उन्हें काफी प्रभावित किया। उनका कहना है कि यहां की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत पर्यटकों को अपनी ओर खींचने की पूरी क्षमता रखती है।
हालांकि, उन्होंने कुछ कमियों की ओर भी ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, पर्यटन स्थलों पर वॉशरूम जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी महसूस हुई। साथ ही बाहरी पर्यटकों के लिए बेहतर होटल, स्पष्ट दिशा-निर्देश (डायरेक्शन बोर्ड) और अन्य सुविधाएं विकसित करने की जरूरत है।
डॉक्टर पूर्वी का मानना है कि अगर इन सुविधाओं पर ध्यान दिया जाए, तो बस्तर देश-विदेश के पर्यटकों के लिए एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बन सकता है। अब जब क्षेत्र नक्सल मुक्त हो रहा है, तो यहां घूमने आना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा सुरक्षित और सुखद अनुभव साबित हो सकता है।

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