जगदलपुर, 14 फरवरी 2026। बस्तर जिले में ग्रामीण स्वच्छता को नई दिशा देने के लिए राज्य स्तर और यूनिसेफ की संयुक्त टीम ने दो दिवसीय दौरा कर जमीनी हालात का आकलन किया। इस दौरान ग्राम पंचायतों को ओडीएफ प्लस मॉडल के रूप में विकसित करने, ठोस-तरल अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने और पंचायत स्तर पर आय सृजन के नवाचारों पर विशेष जोर दिया गया।
राज्य सलाहकार पुरुषोत्तम पांडा, यूनिसेफ प्रतिनिधि सुधांशु पाण्डेय, जिला समन्वयक तथा विकासखंड समन्वयकों की टीम ने 11 और 12 फरवरी को विभिन्न पंचायतों का भ्रमण किया। पहले दिन टीम नगरनार पहुँची, जहां सरपंच और ग्रामीणों के साथ बैठक कर इसे मॉडल ग्राम पंचायत बनाने की रणनीति पर चर्चा हुई। कचरा प्रबंधन को एमआरएफ से जोड़ने, ई-रिक्शा के माध्यम से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण शुरू करने और महिला समूहों को इससे जोड़ने पर सहमति बनी। पंचायत सौंदर्यीकरण के लिए एनएमडीसी के सीएसआर फंड के उपयोग की संभावनाएं भी तलाशने की बात कही गई।
दूसरे दिन टीम ने दरभा, तोकापाल और बस्तर विकासखंड की पंचायतों का निरीक्षण किया। दरभा के कामानार में सेग्रीगेशन शेड का निरीक्षण कर स्वच्छताग्राही दीदियों के कार्यों की सराहना की गई तथा उन्हें समय पर भुगतान और सुरक्षा किट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। वजन तिहार कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को कुपोषण और स्वच्छता के संबंधों के बारे में जागरूक किया गया।
तोकापाल के सिंगनपुर में सामुदायिक स्वच्छता परिसर को शादी-विवाह जैसे आयोजनों में उपयोग शुल्क के साथ संचालित करने का नवाचारी सुझाव दिया गया, जिससे पंचायत की आय बढ़ाई जा सके। वहीं धरमाउर के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और सोनारपाल के फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट की कार्यप्रणाली का भी जायजा लेकर उन्हें “क्लीन एंड ग्रीन” मानकों के अनुरूप संचालित करने और नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए।
स्कूलों और आंगनबाड़ियों में गंदे पानी के प्रबंधन के लिए सोख्ता गड्ढों और नाडेप निर्माण पर विशेष जोर दिया गया, ताकि शिक्षण संस्थान स्वच्छता के मॉडल केंद्र बन सकें। दौरे के अंत में जिला पंचायत में अधिकारियों के साथ बैठक कर फील्ड विजिट के निष्कर्ष साझा किए गए और जिले की स्वच्छता रैंकिंग सुधारने के लिए आगामी कार्ययोजना तैयार की गई।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) को रफ्तार: बस्तर के गांवों में पहुँची राज्य-यूनिसेफ टीम, मॉडल पंचायतों पर फोकस