जगदलपुर/छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित भूमकाल स्मृति दिवस रैली के दौरान कुख्यात नक्सली माड़वी हिडमा के समर्थन में गीत बजाए जाने का मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। रैली में मौजूद कुछ लोगों के झूमने के वीडियो सामने आने के बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप–प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने बयान देते हुए कहा कि जो भी “जल, जंगल और जमीन” की रक्षा करेगा, उसे समर्थन मिलेगा और जो इनके दोहन में शामिल होगा, उसका विरोध किया जाएगा—चाहे वह कोई संगठन, सरकार या कंपनी ही क्यों न हो। उन्होंने प्रदेश में खनिज संपदा के दोहन और आदिवासियों के अधिकारों के हनन का आरोप भी लगाया।
हिडमा को “जल, जंगल और जमीन” का रखवाला मानने के सवाल पर उन्होंने कहा कि बात किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि संरक्षण के मुद्दे की है—समर्थन सिद्धांतों को है, व्यक्ति विशेष को नहीं।
वहीं राज्य सरकार की ओर से कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का रुख हमेशा नक्सलियों के प्रति नरम रहा है और बस्तर के विकास में बाधा डालने की राजनीति की जाती रही है।
पिछले वर्ष मुठभेड़ में मारा गया था हिडमा
गौरतलब है कि सुरक्षा बलों ने पिछले वर्ष नवंबर में बड़ी कार्रवाई करते हुए माड़वी हिडमा सहित छह हार्डकोर नक्सलियों को मुठभेड़ में मार गिराया था। हिडमा पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। वह कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता था, जिनमें सुरक्षाबलों पर घातक हमले भी शामिल हैं।
सुकमा क्षेत्र का निवासी हिडमा 1996 में नक्सल संगठन से जुड़ा था और पीएलजीए बटालियन का कमांडर रहा। गुरिल्ला युद्ध और जंगल आधारित रणनीति में उसकी पकड़ ने उसे लंबे समय तक सुरक्षाबलों से बचाए रखा।
भूमकाल रैली के इस घटनाक्रम ने एक बार फिर बस्तर की संवेदनशील परिस्थितियों और राजनीतिक बयानबाज़ी को सुर्खियों में ला दिया है।
भूमकाल रैली में हिडमा के गीतों पर सियासी घमासान कांग्रेस–भाजपा आमने-सामने, नेताओं के तीखे बयान