जगदलपुर, 03 फरवरी 2026:
बस्तर की ऐतिहासिक धरोहर दलपत सागर मंगलवार को सिर्फ अपनी शांत सुंदरता के लिए नहीं, बल्कि अदम्य साहस, प्रशासनिक मुस्तैदी और आपदा प्रबंधन की जीवंत पाठशाला बनने के लिए भी सुर्खियों में रही। आगामी मानसून और संभावित बाढ़ के दृष्टिगत, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा मोचन बल और नगर सेना ने एक संयुक्त मॉक ड्रिल आयोजित की, जिसने प्रशासन की तैयारी और नागरिकों की जागरूकता दोनों को परखा।
अभ्यास की शुरुआत होते ही दलपत सागर का तट मोटर बोट्स की गर्जना से गूंज उठा। काल्पनिक बाढ़ की स्थिति में पानी में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए जवानों ने युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन किया। इस दौरान लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय जैसे मानक उपकरणों के साथ-साथ, खाली बोतलें और तेल के कनस्तरों से बनाये गए तुरंत जीवनरक्षक उपकरणों का भी प्रयोग किया गया। यह सब देखकर वहां उपस्थित नागरिकों ने अद्भुत तकनीक और सूझबूझ का अनुभव किया।
रेस्क्यू के बाद जीवनरक्षण की अगली कड़ी में सीपीआर का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। स्थानीय विद्यार्थियों ने डमी पर सीपीआर का प्रदर्शन कर यह साबित किया कि नई पीढ़ी भी आपदा से निपटने के लिए तैयार है।
इस अवसर पर एनडीआरएफ की तीसरी बटालियन के डिप्टी कमांडेंट पवन जोशी, डिप्टी कलेक्टर सतेंद्र बंजारे और नगर सेनानी संतोष मार्बल सहित शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि आपदा कभी बताकर नहीं आती, इसलिए तैयारी में कोई कमी नहीं होनी चाहिए।
इस मॉक ड्रिल ने नागरिकों के मन में यह विश्वास जगा दिया कि बस्तर के प्रहरी किसी भी प्राकृतिक चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह सजग और सक्षम हैं।
दलपत सागर में अदम्य साहस का पाठ: खाली बोतलों से तैराकी और सीपीआर का अभ्यास