जगदलपुर, 05 सितम्बर 2026। शिक्षक दिवस के अवसर पर राजधानी में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में बस्तर के दो कर्मठ शिक्षकों कामेश्वरी कश्यप और बुधराम कश्यप को राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित किया गया। राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में आयोजित समारोह में प्रदेश के उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षकों के नामों की घोषणा की, जिसमें बस्तर जिले के इन दोनों शिक्षकों का नाम शामिल है।
नवाचार से स्कूल की बदली तस्वीर
बस्तर विकासखंड के पूर्व माध्यमिक शाला मावलीगुड़ा में पदस्थ उच्च श्रेणी शिक्षिका कामेश्वरी कश्यप पिछले 15 वर्षों से ग्रामीण बच्चों की शिक्षा के लिए समर्पित हैं। विद्यालय में संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने ‘कबाड़ से जुगाड़’ तकनीक से पढ़ाई को रोचक बनाया। सहकर्मियों के सहयोग से आकर्षक ‘मुस्कान पुस्तकालय’ की स्थापना की। विद्यार्थियों के विज्ञान मॉडल राज्योत्सव, बस्तर दशहरा और मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में सराहे गए। कोरोना काल में मोहल्ला क्लास संचालित करने के लिए उन्हें ‘कोरोना वारियर्स सम्मान’ भी मिला।
संघर्ष से निकले, जरूरतमंद बच्चों का बने सहारा
दरभा ब्लॉक के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय छिन्दबहार में संस्कृत व्याख्याता बुधराम कश्यप ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन को बच्चों की मदद का जरिया बनाया। बचपन में मीलों पैदल चलकर और मजदूरी करते हुए शिक्षा हासिल करने वाले बुधराम ने 28 वर्षों के सेवाकाल में 600 से अधिक जरूरतमंद विद्यार्थियों की फीस और शिक्षण सामग्री का खर्च स्वयं उठाया। उन्होंने 10 से अधिक निर्धन कन्याओं के विवाह में आर्थिक सहयोग भी दिया। स्कूल छोड़ चुके बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए बाइक रैलियों के जरिए ‘स्कूल चलो अभियान’ को गति दी। हल्बी और धुरवी बोली के संरक्षण, लेखन, वैश्विक सम्मेलनों में प्रतिनिधित्व और यूट्यूब के माध्यम से सामान्य ज्ञान शिक्षण के क्षेत्र में भी वे सक्रिय हैं।
दोनों शिक्षकों का सम्मान बस्तर के लिए गौरव का विषय है। उनके समर्पण, नवाचार और सेवाभाव ने न सिर्फ विद्यार्थियों का भविष्य संवारा, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में पूरे अंचल का मान बढ़ाया है।