4सितंबर 2026/
नई दिल्ली। 12-13 सितंबर को भारत मंडपम में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले भारत के सामने कई अहम रणनीतिक और आर्थिक मुद्दे हैं। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत के लिए ब्रिक्स केवल कूटनीतिक मंच नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, भुगतान व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अपने हित साधने का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।
भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में ऊर्जा सुरक्षा शामिल है। कच्चे तेल और गैस के आयात के लिए समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम के बीच भारत आपूर्ति के नए विकल्प तलाशना चाहता है। इसके साथ ही ब्रिक्स देशों के बीच भुगतान व्यवस्था को आसान बनाने और डॉलर पर अत्यधिक निर्भरता कम करने की दिशा में भी भारत जोर दे सकता है।
रूस के साथ संबंध भी भारत के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है। तेल और रक्षा क्षेत्र में रूस की अहम भूमिका को देखते हुए भारत ब्रिक्स मंच के जरिए अपने रिश्तों को संतुलित रखना चाहता है।
वहीं, चीन के साथ संतुलन, ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बढ़ाना और भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजार तलाशना भी भारत की प्राथमिकताओं में शामिल है। ब्रिक्स देशों की बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्था भारतीय कारोबार के लिए महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध कराती है।
इसके अलावा आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा सहयोग भी भारत के एजेंडे में प्रमुख रहेगा। भारत का जोर है कि आतंकवाद के मुद्दे पर किसी तरह का दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए।
कुल मिलाकर, आगामी ब्रिक्स सम्मेलन भारत के लिए वैश्विक कूटनीति के साथ-साथ ऊर्जा, व्यापार, सुरक्षा और रणनीतिक हितों को मजबूत करने का बड़ा मंच साबित हो सकता है।