रायपुर, 21 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में श्रमिकों के सशक्तिकरण और कल्याण की दिशा में राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। सुरक्षित कार्यस्थल, सामाजिक सुरक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आवास और सम्मानजनक रोजगार के साथ श्रमिकों तक डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जा रही है।
श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन के निर्देशन में श्रम विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों के तहत प्रदेश में अब तक करीब 56.83 लाख संगठित, निर्माण और असंगठित श्रमिकों का पंजीयन किया जा चुका है। वहीं वर्ष 2026 में 30 जून तक विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के जरिए 3.48 लाख श्रमिकों को लाभ मिला है। इन योजनाओं पर करीब 173.32 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
आवास सहायता बढ़कर डेढ़ लाख रुपये
मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के तहत श्रमिकों को आवास निर्माण या घर खरीदने के लिए मिलने वाली सहायता राशि एक लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये कर दी गई है।
वहीं दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों और उनके समूहों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए मिलने वाली सहायता भी एक लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये की गई है। इससे महिला श्रमिकों को स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के अवसर मिल रहे हैं।
श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा पर जोर
श्रमिक परिवारों के बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अटल कैरियर निर्माण योजना शुरू की गई है। इसके तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी।
इसके अलावा अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत पात्र निर्माण श्रमिकों के पहले दो बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा दी जा रही है। वर्ष 2026-27 से लाभान्वित बच्चों की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है।
5 रुपये में पौष्टिक भोजन
शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के तहत पंजीकृत निर्माण, संगठित और असंगठित श्रमिकों को महज 5 रुपये में गरम और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 18 जिलों में 39 भोजन केंद्र संचालित हैं।
डिजिटल सेवाओं से आसान हुआ पंजीयन
श्रम विभाग का ई-श्रम साथी मोबाइल एप श्रमिकों और नियोजकों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में काम कर रहा है। इसके जरिए श्रमिक स्वयं पंजीयन कर सकते हैं और रोजगार से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
सरकार द्वारा मॉडल लेबर चौक फेसिलिटेशन सेंटर भी विकसित किए जा रहे हैं, जहां पंजीयन, योजनाओं के आवेदन, भोजन, पेयजल और विश्राम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी।
सामाजिक सुरक्षा का भी विस्तार
मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के तहत सामान्य मृत्यु पर आश्रितों को 1 लाख रुपये, कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु पर 5 लाख रुपये और स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में 2.50 लाख रुपये की सहायता दी जाती है।
कुल मिलाकर, राज्य सरकार का दावा है कि श्रम विभाग की इन पहलों से श्रमिकों को केवल योजनाओं का लाभ ही नहीं मिल रहा, बल्कि उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक रोजगार के जरिए विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।