रायपुर, 26 जुलाई 2026। बारिश होगी या नहीं, तूफान आएगा या गर्मी बढ़ेगी, इसकी सटीक जानकारी मौसम विभाग आखिर कैसे देता है? भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) अत्याधुनिक सैटेलाइट, डॉप्लर वेदर रडार, मौसम मापने वाले गुब्बारों और सुपर कंप्यूटर की मदद से मौसम का पूर्वानुमान तैयार करता है। यही वजह है कि विभाग की कई चेतावनियां 99 प्रतिशत तक सटीक मानी जाती हैं।
इस वर्ष अल-नीनो के प्रभाव के चलते देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताई गई थी। छत्तीसगढ़ में भी इसका असर देखने को मिल रहा है। प्रदेश में अब तक 398.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य औसत 483 मिमी होना चाहिए था।
मौसम विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरिक्ष में मौजूद मौसम उपग्रह हर कुछ मिनट में बादलों, तापमान और नमी की तस्वीरें भेजते हैं। वहीं डॉप्लर वेदर रडार बादलों की गति, दिशा और वर्षा की तीव्रता पर नजर रखते हैं। इसके अलावा हीलियम गैस से भरे विशेष मौसम गुब्बारे वायुमंडल की ऊंचाई तक जाकर तापमान, हवा की गति और आर्द्रता का डेटा जुटाते हैं।
इन सभी स्रोतों से प्राप्त लाखों आंकड़ों का विश्लेषण अत्याधुनिक सुपर कंप्यूटर करते हैं। यही कंप्यूटर मौसम के संभावित बदलावों का आकलन कर पूर्वानुमान और चेतावनी जारी करते हैं। समय के साथ तकनीक में सुधार होने से मौसम पूर्वानुमान की सटीकता लगातार बढ़ी है, जिससे किसानों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और आम लोगों को समय रहते जरूरी जानकारी मिल पा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते जलवायु पैटर्न और अल-नीनो जैसी वैश्विक मौसमी घटनाओं के बीच आधुनिक तकनीक मौसम पूर्वानुमान को पहले से कहीं अधिक विश्वसनीय बना रही है।