30 साल से अंधेरे में मातालकुडूम: दूषित झरिया का पानी पीने को मजबूर ग्रामीण, सड़क-बिजली आज भी सपना

27मई 2026

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा ब्लॉक के दूरस्थ गांव मातालकुडूम की तस्वीर आज भी विकास के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। ग्राम पंचायत गोण्डाहुर के इस छोटे से गांव में करीब 18 परिवार रहते हैं, लेकिन यहां आज तक सड़क, बिजली और साफ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं। भीषण गर्मी के बीच गांव के लोग दूषित झरिया के पानी पर निर्भर हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों के बीमार पड़ने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव का एकमात्र हैंडपंप कई वर्षों से खराब पड़ा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक उसकी मरम्मत नहीं कराई गई। मजबूरी में महिलाएं और बच्चे तपती धूप में कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाते हैं। यही गंदा पानी पीने, खाना बनाने, नहाने और कपड़े धोने तक में इस्तेमाल किया जा रहा है। गांव वालों के मुताबिक बारिश के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं, क्योंकि झरिया का पानी पूरी तरह मटमैला और असुरक्षित हो जाता है।

मातालकुडूम केवल पानी की समस्या से ही नहीं जूझ रहा, बल्कि यहां तक पहुंचने के लिए आज भी सिर्फ एक संकरी पगडंडी का सहारा है। बरसात में यह रास्ता दलदल में बदल जाता है, जिससे गांव का संपर्क लगभग कट जाता है। गांव में बिजली नहीं होने से शाम ढलते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। छोटे बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्र जैसी जरूरी सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चुनाव के समय नेता गांव पहुंचकर विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही गांव फिर उपेक्षा का शिकार बन जाता है। करीब 30 साल पुराने इस गांव में अब तक मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पाना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द सड़क, बिजली और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि उन्हें भी सामान्य जीवन जीने का अधिकार मिल सके।

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