26मई2026
बस्तर के घने जंगलों और दुर्गम आदिवासी इलाकों में वर्षों तक चुपचाप सेवा करने वाले डॉक्टर दंपति को आखिरकार देश ने बड़ा सम्मान दिया है। डॉ. रामचंद्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले को चिकित्सा और मानव सेवा के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है।
करीब चार दशक पहले जब बस्तर के कई गांव स्वास्थ्य सुविधाओं से पूरी तरह दूर थे, तब इस दंपति ने शहरों की सुविधाजनक जिंदगी छोड़कर आदिवासी अंचलों का रास्ता चुना। गांव-गांव जाकर मरीजों का इलाज करना, जरूरतमंदों तक दवाइयां पहुंचाना और लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना इनके जीवन का हिस्सा बन गया।
अबूझमाड़ और दंतेवाड़ा जैसे इलाकों में जहां पहुंचना भी आसान नहीं माना जाता, वहां यह दंपति लगातार लोगों के बीच रहा। कई बार लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ी, तो कभी सीमित संसाधनों में ही मरीजों का उपचार करना पड़ा। लेकिन सेवा का यह सफर कभी नहीं रुका।
आदिवासी समाज के बीच वर्षों तक काम करने के कारण लोग इन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं। यही वजह है कि स्थानीय लोग इन्हें सम्मान और अपनत्व से “डॉक्टर भैया-भाभी” कहकर बुलाते हैं।
पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में खुशी की लहर है। लोगों का कहना है कि यह सम्मान उन अनसुने नायकों के लिए प्रेरणा है, जो दूर-दराज इलाकों में रहकर मानवता की सेवा कर रहे हैं।
डॉ. गोडबोले दंपति की कहानी यह बताती है कि सच्ची सेवा किसी बड़े मंच या प्रचार की मोहताज नहीं होती। समर्पण और संवेदना से किया गया काम एक दिन पूरे देश के लिए प्रेरणा बन जाता है।