23 साल की सेवा पर भ्रष्टाचार का दाग: राष्ट्रपति के आदेश से बर्खास्त हुईं IAS पद्मा जायसवाल

17मई 2026

केंद्र सरकार ने पद्मा जायसवाल भ्रष्टाचार के आरोपों में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी  के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया है। 2003 बैच की AGMUT कैडर की अधिकारी पद्मा जायसवाल पर लगे आरोपों को गंभीर मानते हुए यह फैसला राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू किया गया। यह कार्रवाई प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को इस तरह सेवा से हटाने के मामले बेहद कम देखने को मिलते हैं।
जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला करीब 18 साल पुराना है। वर्ष 2007-08 में पद्मा जायसवाल अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले में उपायुक्त के पद पर तैनात थीं। उसी दौरान उन पर सरकारी पद के दुरुपयोग और सरकारी धन में अनियमितता के आरोप लगे थे। स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद मामले की जांच शुरू हुई और अप्रैल 2008 में उन्हें निलंबित कर दिया गया था। हालांकि बाद में वर्ष 2010 में उनका निलंबन समाप्त कर सेवा में बहाल कर दिया गया था, लेकिन जांच और प्रशासनिक प्रक्रिया लगातार जारी रही।
बताया जा रहा है कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने जांच रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर सख्त कार्रवाई की सिफारिश की थी। AGMUT कैडर से जुड़े मामलों में गृह मंत्रालय और DoPT की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। आखिरकार राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बर्खास्तगी का आदेश जारी किया गया।
पद्मा जायसवाल ने अपने प्रशासनिक करियर में अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली, गोवा और पुडुचेरी जैसे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कई अहम जिम्मेदारियां संभाली थीं। वे शैक्षणिक रूप से भी काफी मजबूत मानी जाती रही हैं। उन्होंने सेंट जेवियर्स स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा हासिल की और बाद में पंजाब यूनिवर्सिटी के यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल से MBA किया। इसके अलावा वे इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (ICSI) से कंपनी सेक्रेटरी की डिग्री भी प्राप्त कर चुकी हैं।
प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ उन्होंने रिसर्च और मैनेजमेंट के क्षेत्र में भी काम किया। बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, इंटरनेशनल अफेयर्स, फाइनेंशियल मैनेजमेंट और लीगल मैनेजमेंट जैसे विषय उनके विशेषज्ञता क्षेत्र माने जाते रहे हैं। लेकिन अब भ्रष्टाचार के आरोपों में हुई इस कार्रवाई ने उनके लंबे प्रशासनिक करियर पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
फिलहाल इस मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पद्मा जायसवाल ने इस तरह के किसी आधिकारिक बर्खास्तगी आदेश की जानकारी होने से इनकार किया है।

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