दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण में सजा हास्य कवि सम्मेलन, कविताओं और ठहाकों से गूंजा जगदलपुर

जगदलपुर, 8मार्च 2026।
होली के पावन अवसर पर 70मार्च को जगदलपुर की प्रबुद्ध जनता ने दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण में देर रात तक चले हास्य कवि सम्मेलन का भरपूर आनंद लिया। कवियों ने हास्य और व्यंग्य की रचनाओं से श्रोताओं को खूब हंसाया, वहीं श्रृंगार रस की कविताओं पर श्रोता झूमते नजर आए।
‘जगत दीदी’ के नाम से प्रसिद्ध सुश्री अनिता राज के आशीर्वाद से साहित्य एवं कला समाज, जगदलपुर द्वारा इस हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अनिता राज का सम्मान भी किया गया।
कार्यक्रम में संजय पाण्डे (महापौर, नगर निगम जगदलपुर), खेमसिंह देवांगन (सभापति, नगर निगम जगदलपुर), योगेन्द्र पाण्डे (वरिष्ठ पार्षद), वेद प्रकाश पाण्डे (अध्यक्ष, 360 अरण्यक ब्राह्मण समाज), विमल बोथरा (वरिष्ठ उपाध्यक्ष, बस्तर चेम्बर ऑफ कॉमर्स), आनंद मोहन मिश्रा (चिंतक एवं समाजसेवक) तथा मनीष मूलचंदानी (अध्यक्ष, पूज्य सिंधी पंचायत) सहित शहर के कई पार्षद और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कवि नरेन्द्र पाढ़ी ने अपने रंगमंचीय अंदाज में वैलेंटाइन डे पर मोटी पत्नी द्वारा दुबले पति को गले लगाने पर सांस रुक जाने का हास्य चित्रण कर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। वहीं सुरेन्द्र कुमार ने भ्रष्टाचार पर व्यंग्य करते हुए पंक्तियां सुनाईं—
“रिश्वत देना पाप है, राष्ट्रहित में अभिशाप है,
सबको इसका ज्ञान है, राष्ट्र का किसे ध्यान है,
सौ में अस्सी बेईमान हैं, फिर भी मेरा देश महान है।”
इस अवसर पर साहित्य एवं कला समाज, जगदलपुर ने डायमंड म्यूजिकल ग्रुप के साथ मिलकर मधुर गीतों की सुरमयी संध्या भी प्रस्तुत की। युवा कवियत्री नीता पाण्डे ने हल्बी भाषा में माता दंतेश्वरी की वंदना कर कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।
कार्यक्रम का संचालन सनत सागर ने अपने हास्यपूर्ण अंदाज में किया। योगी पर उनकी कविता—
“टेढ़ा-मेढ़ा चलने वालों को सीधा-सीधा चलना सिखलाता है,
वो कोई पोलियो का डॉक्टर नहीं, मिस्टर योगी कहलाता है।”
पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं।
कवि सम्मेलन में उपेन्द्र त्रिपाठी (किरंदुल), शकुन शेण्डे (बचेली), विशाल आवारा (गीदम), महेन्द्र जैन (गीदम), सुभाष जगदलपुरिया (चारामा), डालेश्वरी पाण्डे, भोजराज साहू और श्रीवर सिंह ठाकुर (सभी जगदलपुर) ने भी अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं का मन मोह लिया।
गौरतलब है कि इस वर्ष कवियों ने आपस में सहयोग राशि एकत्रित कर स्वयं ही कवि सम्मेलन आयोजित किया, जिसे साहित्य को जीवंत बनाए रखने की एक सराहनीय पहल माना जा रहा है।

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