12 साल की उम्र में चलाया ट्रैक्टर, अब रोज 540 KM दौड़ाती हैं बस; अलीगढ़ की सोनू मलान बनीं मिसाल

अलीगढ़-नोएडा रूट पर रोडवेज बस चलाती हैं मंडल की इकलौती महिला चालक, सोशल मीडिया पर भी लाखों लोग करते हैं फॉलो

उत्तर प्रदेश 20 अक्टूबर 2026। पुरुषों के वर्चस्व वाले माने जाने वाले परिवहन क्षेत्र में अलीगढ़ की सोनू मलान ने अपनी मेहनत और हौसले से अलग पहचान बनाई है। महज 12 साल की उम्र में ट्रैक्टर चलाना शुरू करने वाली सोनू आज उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में बस चालक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। वह अलीगढ़ से नोएडा के बीच प्रतिदिन करीब 540 किलोमीटर बस चलाकर यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं।

28 वर्षीय सोनू मलान अलीगढ़ मंडल की इकलौती महिला बस चालक हैं। वह वर्ष 2021 से परिवहन निगम में सेवाएं दे रही हैं। उनके लिए बस चलाना सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि बचपन से जुड़े शौक को पेशे में बदलने की कहानी भी है।

बचपन का शौक बना करियर

अलीगढ़ के जट्टारी क्षेत्र के हजियापुर गांव की रहने वाली सोनू को बचपन से ही वाहन चलाने का शौक था। उन्होंने महज 12 वर्ष की उम्र में खेती-किसानी के काम के लिए ट्रैक्टर चलाना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे यही शौक उनका जुनून बन गया।

वर्ष 2021 में जब उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में महिला बस चालकों की नियुक्ति का अवसर आया, तो सोनू ने भी आवेदन किया। चयन के बाद उन्होंने बस चालक के रूप में अपनी नई पारी शुरू की और आज अपनी कुशल ड्राइविंग तथा अनुशासन के दम पर पहचान बना चुकी हैं।

रोज चार चक्कर, करीब 540 किलोमीटर का सफर

सोनू अलीगढ़-नोएडा मार्ग पर रोडवेज बस चलाती हैं। वह प्रतिदिन चार चक्कर लगाकर करीब 540 किलोमीटर की दूरी तय करती हैं। स्टीयरिंग पर सोनू को देखकर कई यात्री पहले आश्चर्य जताते हैं, लेकिन उनकी ड्राइविंग और जिम्मेदारी देखकर प्रशंसा भी करते हैं।

उनका काम यह संदेश देता है कि किसी पेशे को महिला या पुरुष के दायरे में बांधने के बजाय योग्यता, प्रशिक्षण और मेहनत को महत्व दिया जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर भी लाखों की पहचान

सोनू मलान की लोकप्रियता बस की सवारी तक सीमित नहीं है। वह सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय हैं और बस चलाने से जुड़े वीडियो साझा करती हैं। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, उनके यूट्यूब पर करीब दो लाख, इंस्टाग्राम पर डेढ़ लाख और फेसबुक पर साढ़े छह लाख फॉलोअर्स हैं।

उनके वीडियो को पसंद करने वाले लोग उनके काम और आत्मविश्वास से प्रेरणा लेते हैं। इस तरह सोनू सड़क पर अपनी जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ डिजिटल मंचों के जरिए भी महिलाओं को अपने सपनों की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दे रही हैं।

परिवार का मिला साथ, रूढ़ियों को दी चुनौती

सोनू के मुताबिक, शुरुआत में कुछ लोगों ने कहा कि बस चलाना पुरुषों का काम है, लेकिन उन्होंने अपनी रुचि और लक्ष्य से पीछे हटना स्वीकार नहीं किया। इस सफर में उनके परिवार ने उनका साथ दिया। उनका भाई भी परिवहन निगम में बस चालक है, जबकि उनके पिता शिक्षक पद से सेवानिवृत्त हैं।

सोनू बताती हैं कि बस में सफर करने वाली कई महिलाएं उन्हें देखकर सुरक्षित महसूस करती हैं और उनके काम की सराहना करती हैं। उनके अनुभव से यह भरोसा मजबूत होता है कि सही अवसर, परिवार का सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो महिलाएं किसी भी क्षेत्र में अपनी जगह बना सकती हैं।

सोनू मलान की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो सामाजिक धारणाओं से आगे बढ़कर अपने सपनों को हकीकत में बदलना चाहती हैं। उनका सफर बताता है कि मंजिल तक पहुंचने के लिए जरूरी है—हौसला, मेहनत और खुद पर विश्वास।

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