49.15 हेक्टेयर जलक्षेत्र में मछली पालन और मत्स्य विक्रय का मिलेगा अवसर, मछुआरा समितियों को पहली प्राथमिकता
जगदलपुर, 20 अक्टूबर 2026। बस्तर जिले में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर बढ़ाने के लिए जनपद पंचायत बस्तर ने तारागांव जलाशय को 10 वर्षों के लिए पट्टे पर देने की प्रक्रिया शुरू की है। मछली पालन, मत्स्याखेट और मत्स्य विक्रय के इच्छुक पात्र समूहों एवं समितियों से 30 अक्टूबर 2026 तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक आवेदकों को अपना आवेदन जनपद पंचायत बस्तर कार्यालय में जमा करना होगा।
49.15 हेक्टेयर में फैला है जलाशय
राजस्व अभिलेखों और शासकीय नक्शे के अनुसार, ग्राम तारागांव के खसरा नंबर 26 में दर्ज जलाशय का औसत जलक्षेत्र लगभग 49.15 हेक्टेयर है। इस जलाशय के पट्टे से स्थानीय मछुआरा समूहों, समितियों और पात्र आवेदकों को मत्स्य पालन के माध्यम से रोजगार एवं आय बढ़ाने का अवसर मिल सकेगा।
मछुआरा समितियों को पहली प्राथमिकता
पट्टा आवंटन में शासन के निर्धारित नियमों के अनुसार प्राथमिकता तय की गई है। सबसे पहले पंजीकृत मछुआरा सहकारी समितियों और मछुआ समूहों के आवेदनों पर विचार किया जाएगा। इनके पात्र आवेदक उपलब्ध नहीं होने पर महिला स्व-सहायता समूहों को अवसर दिया जाएगा। इसके बाद मत्स्य पालन में डिप्लोमा, स्नातक या स्नातकोत्तर डिग्रीधारी बेरोजगार युवाओं तथा वर्ष 1965 या उसके बाद डूब क्षेत्र से प्रभावित विस्थापित परिवारों या उनके समूहों के आवेदनों पर विचार किया जा सकेगा।
पट्टे के लिए तय की गईं शर्तें
जलाशय का आवंटन प्रति व्यक्ति 2 हेक्टेयर जलक्षेत्र के मान से किया जाएगा। पट्टा स्वीकृत होने के 10 दिनों के भीतर संबंधित समिति को पहली किश्त जमा कर अनुबंध की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
नियमों के तहत प्रत्येक वर्ष 16 जून से 15 अगस्त तक जलाशय में मत्स्याखेट प्रतिबंधित रहेगा। पट्टाधारक को विभागीय दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए निर्धारित आकार की मछलियों का ही शिकार करना होगा। साथ ही मत्स्य बीज उत्पादन के लिए शासकीय दर पर मत्स्य प्रजनक उपलब्ध कराने की सहमति भी देनी होगी।
जनपद पंचायत बस्तर ने पात्र समूहों और समितियों से निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन जमा करने की अपील की है, ताकि आवंटन प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिल सके।