मेरठ, 15 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा द्वितीय ने पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोनों को फांसी की सजा सुनाई। फैसले के बाद अदालत परिसर में चर्चा तेज हो गई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सजा सुनाए जाने के दौरान मुस्कान और साहिल रोने लगे, जबकि अदालत के बाहर कुछ वकीलों ने मिठाई बांटकर खुशी जताई।
क्या है पूरा मामला?
मेरठ के ब्रह्मपुरी इलाके में रहने वाले सौरभ राजपूत की 3 मार्च 2025 को हत्या कर दी गई थी। इस मामले में उनकी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल पर हत्या का आरोप लगा। नीले ड्रम से जुड़े इस मामले ने देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। करीब डेढ़ साल तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को मृत्युदंड सुनाया।
कौन हैं जज अरविंद कुमार मिश्रा द्वितीय?
इस चर्चित मामले में फैसला सुनाने वाले जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा द्वितीय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने बीए, एलएलबी और एलएलएम की पढ़ाई की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने 31 मई 2003 को सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के रूप में न्यायिक सेवा की शुरुआत की थी। अपने न्यायिक करियर के दौरान वह गोरखपुर, मिर्जापुर, कानपुर, अलीगढ़ और गाजीपुर में विभिन्न पदों पर तैनात रहे। उन्होंने 21 मई 2026 को मेरठ जिला अदालत में कार्यभार संभाला था।
फैसले के दौरान क्या कहा?
रिपोर्टों के अनुसार, सजा सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा कि अधर्म के काम पर सजा देना धर्म होता है। उन्होंने हत्या को नृशंस बताते हुए कहा कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और किसी तरह की माफी स्वीकार नहीं होगी। इसके बाद दोनों को मृत्युदंड सुनाया गया।
70 हजार रुपये का जुर्माना भी
मामले से जुड़े वकील कृष्ण कुमार दुबे के अनुसार, अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत 50 हजार रुपये और धारा 238ए के तहत 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। इस तरह दोनों धाराओं के तहत कुल 70 हजार रुपये के जुर्माने की जानकारी सामने आई है।
मेरठ में महिला को पहली बार मृत्युदंड मिलने का दावा
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि मेरठ में किसी महिला दोषी को पहली बार फांसी की सजा सुनाई गई है। फैसले के बाद मुस्कान और साहिल को विशेष बैरक में भेजे जाने की भी खबर है। हालांकि, मृत्युदंड सुनाया जाना और सजा का अंतिम रूप से निष्पादित होना अलग-अलग कानूनी चरण हैं। दोषियों के पास कानून के तहत अपील और अन्य निर्धारित कानूनी उपायों का विकल्प होता है।
नीले ड्रम हत्याकांड में आए इस फैसले ने एक बार फिर पूरे देश का ध्यान मेरठ की अदालत और इस बहुचर्चित मामले की ओर खींचा है।