जगदलपुर, 29 सितंबर 2026। बस्तर में बारिश थमने के बाद भी बाढ़ का संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। जगदलपुर में इंद्रावती नदी का पानी ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गया है। नदी का जलस्तर 12.39 मीटर दर्ज किया गया, जो वर्ष 1973 में दर्ज किए गए 12.18 मीटर के पुराने उच्चतम स्तर से अधिक है।
बाढ़ के पानी ने नदी किनारे बसे गांवों के साथ ही शहर के कई निचले इलाकों को भी प्रभावित किया है। खेतों में पानी भरने से फसलें डूब गई हैं, वहीं कई जगह सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है। बाढ़ की स्थिति का अंदाजा ड्रोन से सामने आई तस्वीरों से लगाया जा सकता है, जिसमें बड़े इलाके पानी से घिरे दिखाई दे रहे हैं।
आज फिर बढ़ सकता है जलस्तर
ऊपरी हिस्सों से इंद्रावती में पानी की आवक जारी रहने के कारण जगदलपुर में नदी का जलस्तर और बढ़ने की आशंका है। केंद्रीय जल आयोग के इनपुट के आधार पर 29 सितंबर को जलस्तर में करीब 60 सेंटीमीटर से एक मीटर तक की वृद्धि हो सकती है।
इस सूचना के बाद प्रशासन ने नदी के आसपास और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने तथा जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में जाने की अपील की है।
नाव और हेलीकॉप्टर से जारी रहा रेस्क्यू
बाढ़ के बीच बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में पहुंचकर लोगों को सुरक्षित निकाल रहे हैं। प्रशासन के मुताबिक, एक दिन में 833 लोगों को रेस्क्यू किया गया। इनमें 821 लोगों को नाव के जरिए बाहर निकाला गया, जबकि डोंगाघाट में फंसे 12 लोगों को हेलीकॉप्टर से सुरक्षित निकाला गया।
65 राहत शिविरों में हजारों लोग
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए जिले में 65 राहत शिविर बनाए गए हैं। इन शिविरों में करीब 8,894 लोग रह रहे हैं। इनमें शहरी क्षेत्र के 8 शिविरों में 2,620 और ग्रामीण इलाकों के 57 शिविरों में 6,274 लोग ठहरे हुए हैं।
प्रशासन की ओर से शिविरों में भोजन, पेयजल, दवाइयों और स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था किए जाने की जानकारी दी गई है।
निचले इलाकों के लोगों से सतर्क रहने की अपील
इंद्रावती के जलस्तर में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सावधानी बरतने को कहा है। लोगों से अपील की गई है कि बाढ़ के पानी के बीच जाने या जोखिम लेने से बचें और स्थिति बिगड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाएं।