रायपुर, 19 अगस्त 2026। फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर शासकीय सेवा में कार्यरत 186 व्यक्तियों के मामलों की अब त्वरित जांच होगी। इसके लिए राज्य मेडिकल बोर्ड अथवा संभागीय मेडिकल बोर्ड के माध्यम से विशेष मेडिकल जांच कराई जाएगी। जांच के बाद रिपोर्ट निर्धारित समय-सीमा में प्रस्तुत की जाएगी।
समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े और स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल की संयुक्त बैठक में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के मामलों की जांच को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। संबंधित कर्मचारियों को मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होकर दिव्यांगता का परीक्षण कराने के निर्देश जारी किए जाएंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों में लगेंगे विशेष मेडिकल कैंप
बैठक में दिव्यांगजनों के लिए दिव्यांगता प्रमाण-पत्र और यूडीआईडी कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी जोर दिया गया। दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष मेडिकल बोर्ड एवं दिव्यांगता परीक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि पात्र हितग्राहियों को समय पर प्रमाण-पत्र और यूडीआईडी कार्ड मिल सके।
मेडिकल बोर्ड में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी होने पर निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं लेने पर भी सहमति बनी है।
ट्रांसजेंडर समुदाय और नशामुक्ति केंद्रों पर भी चर्चा
बैठक में उभयलिंगी समुदाय के लिए सेक्स रिअसाइनमेंट सर्जरी (SRS) में सहायता, सरकारी अस्पतालों में अलग ट्रांसजेंडर क्लीनिक या वार्ड की व्यवस्था और पात्र हितग्राहियों को समयबद्ध लाभ देने पर चर्चा हुई।
इसके अलावा राज्य में संचालित नशामुक्ति केंद्रों की व्यवस्था मजबूत करने, उनके पंजीयन और उपचार व्यवस्था की समीक्षा करने तथा दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, भिक्षुक, उभयलिंगी एवं नशा पीड़ित लोगों के स्वास्थ्य परीक्षण की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी सहमति बनी।