बिलासपुर हाईकोर्ट का अहम आदेश: नाबालिग की गर्भसमापन याचिका पर मेडिकल बोर्ड करेगा फैसला, 20 जुलाई तक मांगी रिपोर्ट

बिलासपुर, 19 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अवांछित गर्भावस्था से जुड़ी एक नाबालिग की याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा है कि गर्भसमापन (एमटीपी) की अनुमति देने या न देने का निर्णय चिकित्सकीय विशेषज्ञों की राय के आधार पर लिया जाएगा। इसके लिए रायपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को विशेषज्ञ डॉक्टरों का मेडिकल बोर्ड गठित कर पीड़िता का परीक्षण कराने और विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

नाबालिग ने गर्भसमापन की अनुमति के लिए लगाई गुहार

हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि पीड़िता घटना के समय नाबालिग थी और वर्तमान गर्भावस्था अवांछित है। याचिकाकर्ता ने अदालत से गर्भसमापन की अनुमति देने की मांग की। याचिका में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व फैसलों का भी हवाला दिया गया, जिनमें विशेष परिस्थितियों में गर्भसमापन की अनुमति दी गई थी।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले में किसी भी प्रकार का अंतिम निर्णय लेने से पहले पीड़िता की चिकित्सकीय स्थिति का मूल्यांकन आवश्यक है। सरकार ने कहा कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय के बिना गर्भसमापन की अनुमति देना उचित नहीं होगा।

मेडिकल बोर्ड करेगा स्वास्थ्य स्थिति का परीक्षण

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने रायपुर सीएमएचओ को निर्देश दिया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों का एक मेडिकल बोर्ड गठित किया जाए। बोर्ड में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ सहित अन्य आवश्यक विशेषज्ञ डॉक्टरों को शामिल किया जाएगा।

मेडिकल बोर्ड पीड़िता की शारीरिक स्थिति, गर्भावस्था की अवधि और स्वास्थ्य संबंधी अन्य पहलुओं का परीक्षण करेगा। इसके बाद बोर्ड अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर अदालत को सौंपेगा।

जीवन और स्वास्थ्य पर खतरे का होगा आकलन

अदालत ने स्पष्ट किया है कि मेडिकल बोर्ड यह भी जांच करेगा कि गर्भसमापन की प्रक्रिया नाबालिग के लिए चिकित्सकीय रूप से सुरक्षित है या नहीं। रिपोर्ट में यह उल्लेख किया जाएगा कि गर्भसमापन से पीड़िता के जीवन, मानसिक स्वास्थ्य या शारीरिक स्वास्थ्य पर किसी प्रकार का गंभीर खतरा तो नहीं है।

इसके साथ ही गर्भसमापन की स्थिति में संभावित जोखिमों और आवश्यक चिकित्सकीय सावधानियों का भी उल्लेख रिपोर्ट में किया जाएगा, ताकि अदालत तथ्यों के आधार पर निर्णय ले सके।

पीड़िता की गोपनीयता और गरिमा बनाए रखने के निर्देश

हाईकोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पीड़िता की निजता और गरिमा बनाए रखने पर विशेष जोर दिया है। अदालत ने निर्देश दिया कि चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान पीड़िता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाए और उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए।

अदालत ने यह भी कहा कि परिवार की सहमति से एक वयस्क महिला सदस्य को परीक्षण के दौरान पीड़िता के साथ रहने की अनुमति दी जाए। इसके अलावा प्रशासन को पीड़िता की आवाजाही और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

20 जुलाई तक रिपोर्ट पेश करने का आदेश

हाईकोर्ट ने रायपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को 20 जुलाई 2026 तक मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद अदालत मामले की अगली सुनवाई करेगी और उसी के आधार पर गर्भसमापन की अनुमति संबंधी अंतिम फैसला लिया जाएगा।

यह मामला नाबालिगों के अधिकार, स्वास्थ्य सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया के बीच संतुलन से जुड़ा होने के कारण विशेष महत्व रखता है। अब सभी की नजरें मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और हाईकोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हैं।

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