कांकेर की ऐतिहासिक पुरानी कचहरी बनी युवाओं के सपनों की उड़ान, शिक्षा और संस्कृति का नया संगम

कांकेर, 26 जून 2026।
कभी न्यायिक गतिविधियों का केंद्र रही कांकेर की ऐतिहासिक पुरानी कचहरी आज शिक्षा, संस्कृति और युवा सशक्तिकरण की नई पहचान बन चुकी है। जिला प्रशासन की पहल से यह परिसर अब हजारों विद्यार्थियों के लिए उम्मीदों का ऐसा ठिकाना बन गया है, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को भी सहेजने का अवसर मिल रहा है।
‘हमर लक्ष्य’ अभियान के तहत विकसित सेंट्रल लाइब्रेरी-सह-मावा मोदोल आज जिले के युवाओं का पसंदीदा अध्ययन केंद्र बन गया है। प्रतिदिन करीब एक हजार विद्यार्थी यहां शांत और अनुशासित वातावरण में पढ़ाई कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग, उप निरीक्षक भर्ती समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में नियमित कक्षाएं और विशेष मैराथन क्लासेस संचालित की जा रही हैं। इसका सकारात्मक परिणाम भी सामने आया है। अब तक इस केंद्र से अध्ययन कर चुके 89 युवा विभिन्न शासकीय सेवाओं में चयनित होकर सफलता की नई मिसाल कायम कर चुके हैं।
यह परिसर केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी संस्कृति और भाषाई विरासत को संरक्षित करने का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। यहां स्थापित कोयाबाना आदिवासी संग्रहालय स्थानीय जनजातीय समाज की परंपराओं, इतिहास, जीवनशैली और सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है। वहीं गोंडी और हल्बी भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से लगभग 80 विद्यार्थी अपनी मातृभाषा सीखकर अपनी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत कर रहे हैं।
ऐतिहासिक प्रवेश द्वार, हरियाली से घिरा शांत परिसर, सुव्यवस्थित उद्यान और आधुनिक अध्ययन सुविधाएं इस स्थान को और भी आकर्षक बनाती हैं। विद्यार्थी, अभिभावक और यहां आने वाले पर्यटक इस अनूठी पहल की सराहना करते हैं। एक समय न्याय का प्रतीक रही पुरानी कचहरी आज ज्ञान, संस्कृति और भविष्य निर्माण का ऐसा केंद्र बन गई है, जहां से हर दिन नए सपने आकार ले रहे हैं और सफलता की नई कहानियां लिखी जा रही हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *