18मई 2026
नारायणपुर। कभी नक्सलियों के गढ़ के रूप में पहचाने जाने वाला अबूझमाड़ अब बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। वर्षों तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहे इस अति संवेदनशील वनांचल में अब शिक्षा की रोशनी पहुंचने लगी है। नारायणपुर जिले के दूरस्थ गांव कारकाबेड़ा में आजादी के बाद पहली बार प्राथमिक स्कूल की शुरुआत हुई है। गांव में स्कूल खुलने से ग्रामीणों में उत्साह का माहौल है और बच्चों के चेहरों पर नई उम्मीद दिखाई दे रही है।
दरअसल, हाल ही में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में कारकाबेड़ा के ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने गांव में स्कूल खोलने की मांग रखी थी। ग्रामीणों का कहना था कि छोटे बच्चों को पढ़ाई के लिए दूर-दराज के इलाकों में जाना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती थी। मांग को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई शुरू की।
कलेक्टर के निर्देश पर शिक्षा विभाग की टीम ने गांव का सर्वे किया, जिसमें करीब 20 बच्चे प्राथमिक शिक्षा के लिए पात्र पाए गए। इसके बाद अधिकारियों, शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों की संयुक्त टीम दुर्गम पहाड़ियों, नदी-नालों और जंगलों को पार करते हुए लगभग पांच घंटे पैदल चलकर कारकाबेड़ा पहुंची। वहां ग्रामीणों की मौजूदगी में नवीन प्राथमिक शाला का शुभारंभ किया गया।
स्कूल शुरू होते ही बच्चों को निःशुल्क ड्रेस, किताबें, स्लेट, पेंसिल और अन्य शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई। पहली बार गांव में स्कूल खुलने से बच्चों और अभिभावकों में खासा उत्साह देखने को मिला। ग्रामीणों का कहना है कि अब उनके बच्चों को शिक्षा के लिए जान जोखिम में डालकर दूर नहीं जाना पड़ेगा।
फिलहाल स्कूल संचालन के लिए स्थानीय स्तर पर अतिथि शिक्षक की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का मानना है कि आने वाले समय में इस स्कूल से आसपास के अन्य गांवों के बच्चों को भी लाभ मिलेगा।
अबूझमाड़ के भीतर बसे इस गांव में स्कूल का खुलना केवल एक शासकीय उपलब्धि नहीं, बल्कि यह उस बदलते बस्तर की तस्वीर है जहां बंदूक की जगह अब बच्चों के हाथों में किताबें दिखाई दे रही हैं।